अभिषेक बनर्जी और सीएम ममता बनर्जी
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पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा उठ रही हैं। आज सीएम ने एसआईआर के मुद्दे पर भारतीय चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आयोग पर आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान उसने विभिन्न धार्मिक और धर्मार्थ संगठनों के सदस्यों को भी नहीं बख्शा।
मुख्यमंत्री ने नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में तीन चुनावी रैलियों को संबोधित किया। इनमें से दो रैलियों में, आयोग पर हमला बोलते हुए उन्होंने विशेष रूप से स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन, तथा मदर टेरेसा द्वारा स्थापित 'मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी' का नाम लिया।
मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े लोगों का नाम हटाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 'मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी' से जुड़े 300 लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के संन्यासियों के नाम भी काटे गए।
अल्पसंख्यकों के जिलों को बनाया गया निशाना
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रक्रिया के दौरान आयोग ने विशेष रूप से उन जिलों को निशाना बनाया जहां अल्पसंख्यकों और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों की आबादी ज्यादा है। मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और नदिया जैसे जिलों में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए हैं।
किन समुदायों को बनाया गया निशाना
उत्तर 24 परगना के बनगांव उप-मंडल में, मतुआ समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया है। वहीं नदिया के चकदाहा और हरिणघाटा जैसे इलाकों और उत्तर 24 परगना के गाइघाटा में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नामों को हटाया गया है।
माकपा पर भाजपा की मदद का आरोप
मुख्यमंत्री ने माकपा पर कई विधानसभा क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी के साथ गुपचुप समझौता करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि माकपा के नेताओं को पता था कि वे जीत नहीं पाएंगे, इसलिए वे भाजपा विरोधी वोटों को बांटकर भाजपा की जीत पक्की करने की कोशिश करेंगे।