पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने मणिपुर के हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने मणिपुर के लोगों से मानवता के लिए शांति कायम करने की अपील की। उन्होंने मणिपुर के लोगों के साथ खड़े रहने का आश्वासन भी दिया।
ममता बनर्जी ने ट्वीट किया कि मणिपुर की हृदय विदारक कहानियां सुनकर मेरा दिल बहुत दुखता है। इंसानों को कभी भी नफरत के क्रूर प्रयोगों की पीड़ा नहीं सहनी चाहिए। फिर भी सत्ता में बैठे लोगों की चुप्पी के सामने हमें यह जानकर सांत्वना मिलनी चाहिए कि I.N.D.I.A. घावों को भर देगा और मानवता की लौ को फिर से जगाएगा।
इससे पहले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार से दो दिनों के लिए मणिपुर का दौरा किया। गठबंधन में टीएमसी भी शामिल है। ममता ने कहा कि मैं मणिपुर के बहादुर भाइयों और बहनों से मानवता की खातिर शांति अपनाने की अपील करती हूं। हम आपके साथ हैं और अटूट समर्थन और करुणा की पेशकश कर रहे हैं।
मणिपुर मुद्दा राष्ट्र के लिए सुरक्षा समस्या पैदा कर सकता है: विपक्षी गठबंधन
विपक्षी दलों के गठबंधन ने कहा कि अगर मणिपुर में जातीय संघर्ष का जल्द समाधान नहीं किया गया तो यह पूरे देश के लिए सुरक्षा समस्याएं पैदा कर सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी के लिए उनकी आलोचना करते हुए कहा कि इससे पूर्वोत्तर राज्य में जातीय संघर्ष के प्रति उनकी उदासीनता पता चलती है।
विपक्षी गठबंधन झारखंड में राज्यव्यापी प्रदर्शन करेगा
विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ हिंसा प्रभावित मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की घटना के विरोध में मंगलवार को झारखंड में राज्यव्यापी प्रदर्शन करेगा। इसका मकसद पूर्वोत्तर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अपनी मांग को लेकर दबाव बनाना है। यह फैसला कांग्रेस भवन में गठबंधन की राज्य स्तरीय बैठक के दौरान लिया गया।
सुवेंदु अधिकारी ने किया पलटवार
मणिपुर को लेकर ममता बनर्जी के ट्वीट पर पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह राजनीतिक रूप से दुर्भावनापूर्ण ट्वीट है। ममता बनर्जी के प्रशासन ने राज्य में पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। पीएम मोदी की सरकार कुछ ही महीनों में 10 साल पूरे कर लेगी और उनकी सरकार पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है। पीएम मोदी के नेतृत्व में देश ने प्रगति की है और वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है।
अब तक 160 से ज्यादा की मौत
मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को आदिवासी एकजुटता मार्च का आयोजन किया गया था। इसके बाद से ही राज्य में हिंसा भड़क गई थी। इस जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।