10 जनवरी को सेलेक्ट कमेटी की मीटिंग में जाने से पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को अनुमान था कि प्रधानमंत्री आलोक वर्मा पर कार्रवाई के लिए अड़ेंगे। सूत्र बताते हैं कि खड़गे को इसका अनुमान नौ जनवरी को ही हो गया था। 10 जनवरी को जब खड़गे जब सेलेक्ट कमेटी की बैठक में पहुंचे तो प्रधानमंत्री को देखने के बाद भी उन्हें यही एहसास हुआ।
खड़गे ने अपनी बात कही, पूरा पक्ष रखा, लेकिन पीएम का कहना था कि सीबीआई निदेशक पर आरोप हैं तो उन्हें जांच एजेंसी से हटा दिया जाए। इस प्रकरण को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे अब भी अड़े हुए हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर वर्मा को हटाने संबंधी सीवीसी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है।
खड़गे ने अपनी मांग में जस्टिस(रिटायर) एके पटनायक की जांच रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करने की मांग की है। खड़गे का मानना है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के साथ न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत का पालन नहीं हुआ है। वर्मा को सीबीआई जैसी जांच एजेंसी से हटाने से पहले उनका पक्ष भी नहीं सुना गया।
मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार सीबीआई में अधिकारियों की तैनाती को लेकर सरकार का डर साफ दिखाई दे रहा है। विपक्ष के नेता जांच एजेंसी में अंतरिम निदेशक के पद पर एम नागेश्वर राव की नियुक्ति से भी सहमत नहीं हैं। इसे अवैध करार दे रहे हैं। इसके अलावा वह जाहते हैं कि सरकार सेलेक्ट कमेटी की बैठक बुलाकर नये सीबीआई निदेशक पर भी फैसला ले।
खड़गे के करीबियों का कहना है कि इसके बाबत चयन समिति की बैठक को लेकर अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है। खड़गे के अनुसार सेलेक्ट कमेटी की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने 21 जनवरी को अगली बैठक प्रस्तावित की थी, लेकिन उस दिन वह(खडग़े) बाहर हैं। इसके बदले में खडग़े ने 27 जनवरी की तारीख का प्रस्ताव दिया, लेकिन अभी कोई जवाब नहीं आया है।
विपक्ष चाहता है कि नये सीबीआई निदेशक के रूप में किसी स्वतंत्र और अच्छे रिकार्ड वाले अफसर की तैनाती हो। ताकि सीबीआई की साख को धार दी जा सके।
गौरतलब है कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को उच्चतम न्यायालय द्वारा बहाल किए जाने के बाद 10 जनवरी को सेलेक्ट कमेटी की बैठक हुई थी। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के नामित जज जस्टिस सीकरी ने प्रधानमंत्री के साथ सहमति जताते हुए आलोक वर्मा को जांच एजेंसी से हटाए जाने पर अपनी मुहर लगा दी थी।
समझा जा रहा था कि चयन समिति की इसी बैठक में सीबीआई के नए निदेशक के चयन पर भी सहमति बन जाएगी, लेकिन अभी तक नये निदेशक के चयन को लेकर उच्च स्तर पर कोई प्रगति नहीं हुई है। विपक्ष के नेता को इसके लिए अगली बैठक की तारीख का इंतजार है।