वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) के लंबे समय तक संपर्क में रहने से पुरुषों में बांझपन का खतरा बढ़ जाता है, जबकि ट्रैफिक का शोर 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में बांझपन के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। यह जानकारी एक शोध अध्ययन में दी गई है जिसका प्रकाशन प्रतिष्ठित जर्नल बीएमजे में हुआ है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया भर में बांझपन की एक प्रमुख वजह स्वास्थ्य समस्या है जो गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे सात में से एक जोड़े को प्रभावित करती है। कई अध्ययनों में कण वायु प्रदूषण और शुक्राणु की गुणवत्ता और प्रजनन उपचार के बाद सफलता के बीच संबंध अच्छे नहीं पाए गए, लेकिन प्रजनन क्षमता (गर्भधारण की संभावना) पर परिणाम सही नहीं हैं। अब तक किसी भी अध्ययन ने पुरुषों और महिलाओं में बांझपन पर यातायात के शोर के प्रभावों का पता नहीं लगाया था। ऐसे में यह अध्ययन किया गया, जिसमें पता चला कि पांच सालों में सड़क यातायात के शोर के 10.2 डेसिबल उच्च औसत स्तर के संपर्क में आने से 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में बांझपन का खतरा 14 फीसदी बढ़ा हुआ पाया गया।
5,26,056 पुरुषों व 3,77,850 महिलाओं पर किया गया शोध
शोध के निष्कर्ष 30 से 45 साल की आयु के 5,26,056 पुरुषों और 3,77,850 महिलाओं के आंकड़ों पर आधारित हैं, जिनके दो से कम बच्चे हैं और एक साथ रहते हैं या विवाहित हैं। यह शोध 2000 से 2017 के बीच डेनमार्क में रहने वालों पर किया गया है। शोध के अनुसार इस समूह का चयन ऐसे प्रतिभागियों को शामिल करने के लिए किया गया था जो सक्रिय रूप से गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे थे और बांझपन के खतरे में थे। इसमें उन महिलाओं को भी शामिल किया गया जिन्होंने गर्भधारण को रोकने के लिए सर्जरी करवाई थी और उन पुरुषों को भी शामिल किया गया था जिनकी नसबंदी की गई थी।