ब्रिक्स देशों की बैठक में मेहमान बनकर भारत आए मलयेशियाई प्रधानमंत्री का हिंदी प्रेम दिल्ली में दिखा। उन्होंने पूरे उत्साह के साथ तीन देवियां फिल्म का गाना- 'ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत' गुनगुनाया। दिल्ली में ब्रिक्स देशों की बैठक से इतर अनवर इब्राहिम की गायिकी का वीडियो उन्होंने खुद साझा भी किया।
भारत में लगभग 61 साल पहले आई फिल्म तीन देवियां कई मायनों में खास हैं। अभिनय और पटकथा के अलावा फिल्म के गीत-संगीत छह दशकों के बाद भी फिल्म और गीत-संगीत से प्रेम करने वाले लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इस फिल्म के गीत- 'ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत...' के प्रशंसकों में एक नाम मलयेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का भी है। उन्होंने खुद इसकी मिसाल भी पेश की है। देश में हर साल 14 सितंबर को मनाए जाने वाले हिंदी दिवस से पहले इस भाषा से प्रेम की अनोखी मिसाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
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प्रधानमंत्री की गायिकी का वीडियो पसंद कर रहे फोलोअर्स
दरअसल, दिल्ली में ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन से इतर अनवर इब्राहिम की गायिकी सोशल मीडिया वीडियो के माध्यम से सामने आई। वीडियो में इब्राहिम भारत के पियानो बजाने वाले कलाकार के साथ फुरसत के पलों में 'ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत' गाना गुनगुनाते देखे गए। एक्स हैंडल पर ये वीडियो साझा किए जाने के बाद यूजर्स ने दिलचस्प कमेंट्स भी किए हैं।
#WATCH | Delhi: Malaysia’s Prime Minister Anwar Ibrahim sings a popular Hindi song “Khwab Ho Tum Ya Koi Haqeeqat” in Delhi.
क्यों खास है पीएम इब्राहिम का गुनगुनाना?
किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड इस सदाबहार फिल्मी गीत के लिरिक्स मजरूह सुलतानपुरी ने लिखे हैं। गाने के लिरिक्स कितने लोकप्रिय हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज भी लोग अपनी भावनाओं का इजहार करने के लिए इस नग्मे को गुनगुनाते देखे जा सकते हैं। हिंदी या हिंदुस्तानी जबान से लगाव रखने वाले लोगों के लिए ये गीत या मलयेशिया जैसे देश के प्रधानमंत्री की तरफ से हिंदी भाषा के गीत को गुनगुनाना इसलिए भी विशेष अवसर बन गया क्योंकि 14 सितंबर के हिंदी दिवस से पहले एक विदेशी मेहमान ने भाषा को लेकर अपने आचरण से बड़ा संदेश दिया।
ब्रिक्स देशों की बैठक में भारत की मेहमानवाजी पर क्या चर्चा?
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों के लिए भारत ने मेहमानवाजी के विशेष बंदोबस्त किए हैं। भोजन की मेज से लेकर उपहार के तौर पर दिए जाने वाले वस्तुओं में भी भारत की कला और संस्कृति की झलकियां देखी गई हैं। जयपुर के करीब 300 कारीगरों ने मेहमानों के चांदी की परत वाले भोजन के खास बर्तन भी तैयार किए।