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रावण तो बना ही लेते हैं हुजूर, दुआ कीजिए कि अमन के पहरेदार बना सकें

Mon, 10 Oct 2016 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा
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सांकेतिक चित्र - फोटो : Getty images
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रावण तो बना ही लेते हैं हुजूर। पहले दादा बनाते थे। पिताजी ने भी बनाया, अब हमारा परिवार बना रहा है। लेकिन दुआ कीजिए कि हम अमन के पहरेदार बना सकें। मुल्क से आतंक खत्म करने वाले सिपाही बना सकें। सच्ची कारीगरी तो वही है। दिल की यह बात की वर्षों से रावण का पुतला बनाने वालों ने। भरतपुर गेट मथुरा निवासी रईस का कुनबा वर्षों से रावण का पुतला बना रहा है। रईस के दादा अलीबक्स और पिता मुगल भी मथुरा और आसपास के जनपदों में जाकर रावण का पुतला बनाते थे। 
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अब रईस के परिवार वाले और रिश्तेदार आगरा, सूरत, कोटा, अजमेर, फरीदाबाद, उदयपुर, जोतपुर, जयपुर, दिल्ली और मुंबई में जाकर पुतला बनाते हैं। बड़े पुतलों के साथ छोटे-छोटे पुतले भी यह लोग तैयार करते हैं। इन पुतलों को कालोनी और मुहल्ले वाले खरीदकर ले जाते हैं। साठ वर्षीय रईस का कहना है कि पंद्रह दिन के भीतर वह रावण का पुतला बना लेते हैं। कई कारीगरों को इसमें लगाया जाता है। दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के वक्त वह मैदान पर ही रहते हैं। 

रईस ने कहा कि बड़ी बात तो तब है जब हमारे हाथ से अमन के पहरेदार तैयार हों। ऐसे पहरेदार जो देश भर से नफरत और दुश्मनी को खत्म कर दें। हर तरफ भाईचारा हो। प्यार और मोहब्बत फैले। रावण की ही तरह आतंकवाद खत्म हो जाए। रावण का पुतला बनाने वाले जाहिद और शाहिद ने बताया कि एक महीने पहले पुतला बनाने का सामान इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं। 
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अब तो बड़े महंगे हो गए रावण के पुतले

सांकेतिक चित्र - फोटो : Getty images
कोशिश रहती है कि इस साल पुतला हर साल से भी अच्छा बने। ताकि लोग बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को जलाकर दशहरा मना सकें। एक-दूसरे के प्रति बढ़ती नफरत और आतंकवाद से दुखी इन कारीगरों का कहना है कि आतंकवाद रूपी राक्षस का भी खात्मा होना चाहिए। जिस दिन हर तरफ भाईचारा फैलेगा उसी दिन असली राक्षस का अंत होगा।

मथुरा (ब्यूरो)। अब तो रावण के पुतले बहुत महंगे हो गए हैं। एक वो भी वक्त था जब दो से तीन हजार रुपये में रावण का पुतला बन जाता था। अब पच्चीस हजार, पचास हजार और एक लाख तक में पुतला बनाया जा रहा है। कुछ बड़े शहरों में तो इससे भी महंगा हो जाता है। पुतलों में आतिशबाजी भी लगाई जाती है। ब्रज के कलाकार देश के कई राज्यों में रामलीला मंचन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश ही नहीं हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड और बिहार में यहां की रामलीला मंडलियां मंचन कर रही हैं।
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