अप्रैल माह में पत्थरबाज को जीप से बांधकर मानवढाल बनाने और अपनी टीम को सुरक्षित निकालने वाले मेजर लीतुल गोगोई मीडिया के सामने आए। उन्होंने बताया कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए और पत्थरबाजों से निपटने के लिए उन्हें ऐसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा था। मेजर गोगोई ने कहा कि अगर वो उस समय गोली चलाने का आदेश देते, तो कम से कम 12 लोगों की जान चली जाती। साथ ही मतदान कर्मियों की सुरक्षा का भी उन्हें ख्याल रखना था।
गोगोई ने कहा कि उन्हें फोन पर सूचना मिली थी कि मतदान स्थल पर लोग हमला कर रहे थे और वो पेट्रोल बम से सबकुछ तबाह करने की ओर आगे बढ़ रहे थे। ऐसी सूचना मिलने के बाद उन्होंने तुरंत अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर कूच किया, जहां उसपर चारों तरफ से पत्थर बरस रहे थे। ऐसी सूरत में उन्हें पत्थरबाज को ही पकड़कर जीप पर बांध ढाल बनाने के अलावा कुछ नहीं सूझा। गोगोई को सोमवार को सेनाध्यक्ष बिपिन रावत की ओर से सम्मानित किया गया है।
लीतुल गोगोई ने कहा कि वो पत्थरबाज को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे। पर मजबूरी में उन्हें ऐसा करना पड़ा। गोगोई ने कहा कि उन्होंने अपनी टीम को उस जगह से निकालकर पत्थरबाज को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया था।
Then stone pelters started throwing petrol bombs at us, I took that step just to save local people: Major Gogoi
— ANI (@ANI_news) May 23, 2017
गोगोई की मानें तो उस दिन अगर वो ऐसा कदम नहीं उठाते, तो सुरक्षा बलों के साथ ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी बड़ा नुकसान पहुंच सकता था।
We went to a polling booth to check the security situation, and then some people started pelting stones at us: Major Gogoi
— ANI (@ANI_news) May 23, 2017
बता दें कि गोगोई को कठिन परिस्थितियों में साहसपूर्ण फैसला लेने और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सेना की ओर से सम्मानित भी किया गया है।