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श्रीलंका संकट: मैत्रीपाल सिरिसेना ने सभी राजनीतिक पार्टियों से कहा, समझ से काम लें

Tue, 20 Nov 2018 04:55 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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मैत्रीपाल सिरिसेना
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श्रीलंका में शुरू हुआ सियासी संकट दिन ब दिन गहराता जा रहा है। पिछले एक महीने से अधिक समय से संकट से जूझ रहे श्रीलंका के राष्ट्रपति ने एक नया बयान देकर इसे अलग मोड़ दे दिया है। राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना ने कहा है कि अगर देश को सियासी संकट से उबारना है तो संसद में नाम के आधार पर या फिर इलेक्ट्रॉनिक मशीन द्वारा मतदान कराए जाने की जरूरत है। इससे सभी को बराबर का हक मिल सकेगा।  

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सिरीसेना के बयान का हवाला देते हुए डेली मेल ने लिखा है कि नाम के आधार पर मतदान और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग द्वारा कराए गए मतदान को आम जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्वीकार कर सकता है। जबकि ध्वनिमत पारदर्शी प्रणाली नहीं है।

हालांकि इसके लिए ही स्थायी आदेश दिए गए थे। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने सभी राजनीतिक दलों से समझौता करने और समझ के साथ सदन में काम करने का भी अनुरोध किया है। यही नहीं राष्ट्रपति ने आगे होने वाले किसी भी तरह के संघर्ष से बचने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों से अनुरोध किया है कि वह संसद के पास विरोध प्रदर्शन न करें और न ही अपने समर्थकों की भीड़ को ही एकत्रित होने दें। 
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बता दें कि श्रीलंका में सियासी संकट की शुरुआत 26 अक्तूबर को हुई जब सिरीसेना ने अचानक ऐलान किया कि उन्होंने पीएम विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर उनके स्थान पर नए प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की नियुक्ति की है। इसके बाद में सिरीसेना ने संसद को भंग कर दिया। इसके बाद श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने संसद भंग कर नए चुनाव कराने के राष्ट्रपति के आदेश को निरस्त कर दिया।   यहां 19वें संविधान संशोधन को लेकर संसद में भी बहस छिड़ चुकी है। 

संविधान की इस धारा के तहत प्रधानमंत्री को हटाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है। संविधान संशोधन के बाद यह अधिकार संसद में निहित है। ऐसे में संसद संविधान के दायरे में रहते हुए प्रधानमंत्री को पद से हटा सकती है। खास बात यह है कि इस संशोधन की पहल मौजूदा राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और विक्रमसिंघे ने ही की थी। 

 
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