सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के आरडब्ल्यूए फेज एक से पांच में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाते हुए 'स्थिति जैसी है, वैसी ही बनी रहने' का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अरविंद कुमार की पीठ ने शुक्रवार को आरडब्ल्यूए कुतुब एन्क्लेव रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में हरियाणा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।
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हरियाणा सरकार से चार हफ्ते में मांगे गए जवाब
पीठ ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा और कहा, 'अगली सुनवाई तक, सभी पक्ष वर्तमान स्थिति बनाए रखें।' इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरडब्ल्यूए भी कोई निर्माण नहीं गिराएगा। आरडब्ल्यूए की ओर से सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि डीएलएफ के ये रिहायशी इलाके 2008 से गुरुग्राम नगर निगम (एमसीजी) के अंतर्गत आते हैं और केवल वही किसी संपत्ति को गिराने जैसी कार्रवाई कर सकता है, न कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग। इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 13 फरवरी को आदेश दिया था कि डीएलएफ के रिहायशी इलाकों में हो रहे अवैध निर्माण और व्यावसायिक इस्तेमाल पर तुरंत कार्रवाई हो और 19 अप्रैल तक रिपोर्ट दी जाए।
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मामले में हाईकोर्ट ने क्या की थी टिप्पणी
हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि, 'कुछ शक्तिशाली लोगों और प्रशासन की मिलीभगत से कॉलोनी का मूल स्वरूप नष्ट हो रहा है, और अधिकारियों ने इस पर आंखें मूंद ली हैं।' इसके बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने 4000 से ज्यादा नोटिस जारी किए और 2000 से अधिक मकानों को मूल स्थिति में लाने के आदेश दिए। आरडब्ल्यूए का कहना है कि हाई कोर्ट ने पहले 2012 में कहा था कि इस इलाके में विभाग की कोई अधिकारिता नहीं है, लेकिन अब उसी विभाग को कार्रवाई करने के लिए कहा जा रहा है। साथ ही आरडब्ल्यूए का आरोप है कि हाई कोर्ट ने बिना उनकी बात सुने ही फैसला दे दिया। शुक्रवार को जब विभाग की टीम तोड़फोड़ के लिए डीएलएफ पहुंची, तब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उन्हें कार्रवाई रोकनी पड़ी।