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लोकसभा में पीएम मोदी: मांगने के लिए मजबूर करने वाली सोच लोकतंत्र की नहीं... पढ़िए बड़ी बातें

Wed, 10 Feb 2021 05:49 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : लोकसभा टीवी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव दिया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार किसानों का सम्मान करती है। इसके साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, कोविड-19 के बाद की दुनिया, सदन में महिलाओं के महत्व पर भी बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मांगने के लिए मजबूर करने वाली सोच लोकतंत्र की सोच नहीं हो सकती है।  जानिए प्रधानमंत्री के संबोधन की बड़ी बातें...

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, राष्ट्रपति (रामनाथ कोविंद) के भाषण ने भारत की संकल्प शक्ति को प्रदर्शित किया। उनके शब्दों ने भारत के लोगों के बीच विश्वास की भावना को उत्साहित किया है।
  • उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के भाषण के दौरान बड़ी संख्या में महिला सांसद मौजूद रहीं। यह एक महान संकेत है। मैं उन महिला सांसदों को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने सदन की कार्यवाही को अपने विचारों से समृद्ध किया है।
  • कोविड के बाद दुनिया बहुत अलग तरीके से बदल रही है। ऐसे समय में वैश्विक रुझानों से अलग-थलग रहना उत्पादक नहीं होगा। इसीलिए हम आत्मनिर्भर भारत बनाने की ओर काम कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया के लिए अच्छा होगा।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे डॉक्टर, नर्स, कोविड योद्धाओं, सफाई कर्मचारियों और एंबुलेंस चालकों समेत कई लोग परमात्मा की अभिव्यक्ति बन गए, जिसने इस वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत की जंग को मजबूत किया। 
  • उन्होंने कहा, हमारी जैम ट्रिनिटी (JAM Trinity या जन धन-आधार-मोबाइल) ने लोगों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाई। इसने सर्वाधिक गरीबों और पिछड़ों की मदद की।
  • यह सदन, हमारी सरकार और हम उन सभी सम्माननीय किसानों का सम्मान करते हैं जो कृषि कानूनों को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। यही कारण है कि सरकार के उच्च स्तरीय मंत्री लगातार उनसे बात कर रहे हैं। यह किसानों के लिए बड़ा सम्मान है। कृषि क्षेत्र को कठिन चुनौतियों से बाहर लाने के लिए हमने ईमानदारी से प्रयास किए हैं।
  • आज जब हम भारत की बात करते हैं तो मैं स्वामी विवेकानंद की बात का स्मरण करना चाहूंगा। हर राष्ट्र के पास एक संदेश होता है, जो उसे पहुंचाना होता है, हर राष्ट्र का एक मिशन होता है, जो उसे हासिल करना होता है, हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे वो प्राप्त करता है।
  • प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने हंगामा करने की कोशिश की। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि शोर मचाना और बाधा पहुंचाने के प्रयास एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। यह रणनीति है कि शोर मचाते रहिए वरना सच सामने आ जाएगा और स्थितियां कठिन हो जाएंगी। 
  • मोदी ने विपक्षी सांसदों को निशाने पर लेते हुए कहा कि इस तरह से आप लोगों का भरोसा नहीं जीत पाएंगे। वहीं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी से पीएम ने कहा, 'अधीर रंजन जी, अब ज्यादा हो रहा है। मैं आपका सम्मान करता हूं। आपको बंगाल में टीएमसी से ज्यादा प्रचार मिलेगा। चिंता मत करिए, यह अच्छा नहीं लगता, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?'
  • कृषि कानूनों पर चल रहे किसानों के आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कानूनों में खामियां हैं तो हम इसमें बदलाव के लिए तैयार हैं। कानून बनने के बाद एमएसपी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा, मैं देख रहा था कि कांग्रेस के साथियों ने जो चर्चा की, वो इस कानून के रंग पर तो बहुत चर्चा कर रहे थे। अच्छा होता कि उसके कंटेट और इंटेट पर चर्चा करते। ताकि देश के किसानों तक सही चीजें पहुंचती।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद के कृषि संबंधी कानूनों के पारित होने के बाद से कोई मंडी बंद नहीं हुई है। एमएसपी बरकरार है। एमएसपी पर खरीद जारी है। इन तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
  • पीएम ने कहा, 'मैं हैरान हूं पहली बार एक नया तर्क आया है कि हमने मांगा नहीं तो आपने दिया क्यों। दहेज हो या तीन तलाक, किसी ने इसके लिए कानून बनाने की मांग नहीं की थी, लेकिन प्रगतिशील समाज के लिए आवश्यक होने के कारण कानून बनाया गया।'
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि मांगने के लिए मजबूर करने वाली सोच लोकतंत्र की सोच नहीं हो सकती है। हमने देश में बदलाव के लिए हर प्रकार की कोशिश की है। इरादा नेक हो तो परिणाम भी अच्छे मिलते हैं। 
  • हमारे यहां कृषि समाज की संस्कृति का हिस्सा रही है। हमारे पर्व, त्योहार सब चीजें फसल बोने और काटने के साथ जुड़ी रही हैं। हमारा किसान आत्मनिर्भर बने, उसे अपनी उपज बेचने की आजादी मिले, उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि के अंदर जितना निवेश बढ़ेगा, उतना ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। हमारा किसान आत्मनिर्भर बने, उसे अपनी उपज बेचने की आजादी मिले, उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र आवश्यक है लेकिन उसी समय पर निजी क्षेत्र की भूमिका भी अहम है। टेलीकॉम या फार्मा कोई भी सेक्टर ले लीजिए, हमें निजी क्षेत्र का महत्व समझ आता है। अगर भारत मानवता की सेवा कर पाया है तो इसमें निजी सेक्टर के बड़ी भूमिका है। 
  • बीते समय में कुछ लोगों के लिए निजी क्षेत्र के लिए अनुचित शब्दों का इस्तेमाल उनके लिए वोट लेकर आया है लेकिन अब वह समय जा चुका है। निजी क्षेत्र का उत्पीड़न करने की संस्कृति अब स्वीकार्य नहीं है। हम अपने युवाओं का इस तरह से अपमान नहीं होने दे सकते।
  • उन्होंने कहा, देश को आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों के बारे में फर्क करना बहुत जरूरी है। मैं किसान आंदोलन को पवित्र मानता हूं। लेकिन, जब आंदोलनदीवी पवित्र आंदोलनों पर कब्जा कर लेते हैं, उन लोगों की तस्वीरें दिखाते हैं जो गंभीर अपराधों में जेल भेजे गए हैं, क्या इससे कोई उद्देश्य प्राप्त होता है? टोल प्लाजा को काम नहीं करने देना,, टेलीकॉम टॉवरों को नुकसान पहुंचाना, क्या इससे एक पवित्र आंदोलन के उद्देश्य की प्राप्ति हो पाएगी? 
  • प्रधानमंत्री ने कहा, ऐसे लोग हैं जो बातें तो सही करते हैं। लेकिन जब यही करने की बात आती है तो उनके शब्द कभी साकार नहीं हो पाते। जो चुनाव सुधारों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं वही एक देश एक चुनाव का विरोध करते हैं। ये लोग लैंगिक समानता के बारे में बात करते हैं लेकिन तीन तलाक का विरोध करते हैं।

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