सार्वजनिक मंच से या मीडिया में विवादित बयान देकर सुर्खियां बटोरना और बुरी तरह घिरने पर अपने बयानों से पलटी मारना नए जमाने के राजनेताओं का शगल बन गया है। कुछ ऐसी ही मानसिकता वाले राजनेताओं में केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा और भाजपा सांसद उदित राज भी शुमार हो गए हैं।
विदेशी महिला पर्यटकों को स्कर्ट पहनकर अकेले में न निकलने की सलाह देने के बाद केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्यमंत्री को बयान अटपटा लगा तो तुरंत अपने बयान से पलटते हुए कहने लगे कि पर्यटक अकेले निकले तो ध्यान से निकले। वहीं, भाजपा सांसद उदित राज ने ट्वीट करके जमैका के एथलीट उसेन बोल्ट के नौ स्वर्ण पदक जीतने का राज उसके बीफ खाने को बताया, लेकिन बाद में उन्होंने सफाई दे डाली कि उनका इरादा यह बताने का नहीं था।
दरअसल, दोनों नेताओं ने अपने विवादित बयानों को तूल देने का ठीकरा आखिरकार मीडिया पर ही फोड़ा। डॉ. शर्मा ने कहा कि मीडिया में उनके बयानों को गलत तरीके से पेश किया गया। ताजमहल के निरीक्षण के लिए आगरा गए डॉ. शर्मा ने पर्यटकों के साथ बढ़ रही घटनाओं के संदर्भ में यह बयान दिया था।
महेश शर्मा ने कहा, ‘मेरी भी दो बेटियां हैं'
केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा
- फोटो : file photo
अपने बयान पर सफाई देते हुए महेश शर्मा ने कहा, ‘मेरी भी दो बेटियां हैं। मैंने कभी उन्हें नहीं टोका कि क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं, इसकी कभी जरूरत भी नहीं पड़ी और न ही मुझे ऐसा कुछ कहने का अधिकार है। मैंने सिर्फ यह सलाह पर्यटकों को धार्मिक स्थलों पर जाने के संदर्भ में दी थी।’
उदित राज के ट्वीट पर जहां विवाद बढ़ता गया, वहीं कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए सवाल भी कर डाला कि क्या सांसद बोल्ट के रसोइये थे। पार्टी द्वारा सफाई देने का निर्देश मिलने के बाद उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश यह बताने की थी कि कोई भी एथलीट विपरीत परिस्थितियों के बावजूद समर्पण के सहारे सफलता हासिल कर सकता है। एथलीटों को नाकामियों के लिए हालत और सुविधाओं की कमी का रोना नहीं रोना चाहिए।
चिकित्सक से राजनेता बने डॉ. महेश शर्मा अक्सर बयानों की शल्य-क्रिया के कारण विवादित रहे हैं। इससे पहले भी वह कई मौकों पर विवाद खड़े कर चुके हैं। कभी वह लड़कियों के अकेले घूमने को देश की संस्कृति नहीं मानते तो कभी सांस्कृतिक प्रदूषण के लिए बाहरी लोगों को दोषी ठहराते रहे हैं। इसी तरह औरंगजेब रोड का नाम बदलकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रोड रखने की सलाह और कुरान-बाइबिल को देश की आत्मा मानने से इनकार कर चुके हैं।