महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही ग्रामविकास व महिला-बालकल्याण मंत्री पंकजा मुंडें की मुसीबत बढ़ गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनसे जल संवर्धन विभाग छीन लिया था। उसके बाद अब पंकजा मुंडे को कोर्ट से दूसरा बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने महिला व बाल विकास विभाग के करीब पौने सात करोड़ रुपये का टेंडर रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पूरक पोषण आहार की निविदा विकेंद्रिय पद्धति के तहत महिला बचत समूह को जारी करना जरूरी है। लेकिन, राज्य सरकार ने केंद्रीय पद्धति के तहत 70 विभाग में निविदा वितरित कर दिया।
इसके खिलाफ 40 महिला बचत समूह ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने सोमवार को सभी टेंडर रद्द करने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही तालुका स्तर पर सर्वे कर नए सिरे से टेंडर जारी करने का आदेश दिया है।
यह फैसला पंकजा मुंडें की महिला व बालकल्याण विभाग को बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे पहले पंकजा पर करीब 62 हजार रुपये के चिक्की टेंडर घोटाले का आरोप लगा था। यह मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विपक्ष ने भी पंकज मुंडे पर हमला बोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा है कि अनियमित तरीके से टेंडर जारी करने के लिए पंकज मुंडे इस्तीफा दें। वहीं एनसीपी के नवाब मालिक ने कहा है कि पोषण आहार में हुई अनियमितता की एसआईटी से जांच कराई जाए।