महाराष्ट्र में स्थानीय चुनावों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मंगलवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि राज्य की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए पांच फरवरी को वोट डाले जाएंगे। वोट डालने के बाद जनता को नतीजों के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि अधिकारियों के मुताबिक, वोटों की गिनती 7 फरवरी को की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया कार्यक्रम
यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद आई है, जिसमें कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा 31 जनवरी से दो हफ्ते बढ़ा दी थी। राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) दिनेश वाघमारे ने एक प्रेस वार्ता में चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी। इसके साथ ही आचार संहिता भी लागू हो गई है।
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नामांकन और वोटिंग का पूरा शेड्यूल
चुनाव आयुक्त ने बताया कि नामांकन भरने की प्रक्रिया 16 जनवरी से शुरू होगी और 18 जनवरी तक चलेगी। कागजों की जांच 19 जनवरी को होगी। नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 21 जनवरी है। इसके अगले दिन यानी 22 जनवरी को चुनाव चिन्ह बांटे जाएंगे और उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होगी। वहीं वोटिंग 5 फरवरी को सुबह 7:30 बजे शुरू होगी और शाम 5:30 बजे तक चलेगी। वोटों की गिनती 7 फरवरी को होगी।
25 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र
ये चुनाव 12 जिलों की जिला परिषदों और उनसे जुड़ी 125 पंचायत समितियों में होंगे। इसके लिए करीब 25,482 मतदान केंद्र बनाए जा रहे हैं। चुनाव को सही तरीके से कराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा।
वोटर लिस्ट में अब नहीं होगा बदलाव
इन चुनावों में भारत निर्वाचन आयोग की 1 जुलाई 2025 तक तैयार वोटर लिस्ट का इस्तेमाल होगा। वाघमारे ने बताया कि नियमों के मुताबिक जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए वोटर लिस्ट अलग-अलग कर दी गई है। अब इस चरण में लिस्ट में कोई नया नाम जोड़े या हटाए नहीं जा सकते हैं।
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मतदाताओं को मिलेंगी ये खास सुविधाएं
मतदान केंद्रों पर बुजुर्गों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों वाली माताओं के लिए खास इंतजाम होंगे। इनमें रैंप, व्हीलचेयर, पीने का पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं शामिल हैं। वाघमारे ने यह भी कहा कि जहां ज्यादा महिला वोटर्स होंगी, वहां ऐसे मतदान केंद्र बनाए जाएंगे जिनका संचालन पूरी तरह महिलाएं करेंगी।
प्रशासन पूरी तरह तैयार
आयोग ने बताया कि हजारों चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, चुनावी क्षेत्र के आकार के हिसाब से उम्मीदवारों के खर्च की सीमा भी अलग-अलग तय की गई है।
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