महाराष्ट्र की सभी 288 विधानसभा सीटों के रुझान आ गए हैं। महायुति गठबंधन 227 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। राज्य में भाजपा गठबंधन की सरकार बनना तय है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी करीब 54 सीटों पर आगे है। रूझानों में पूर्ण बहुमत मिलते ही एकनाथ शिंदे ने मजबूती से मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी ठोक दी है। शिंदे ने कहा है कि, अभी मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह एनडीए की बैठक में तय किया जाएगा। बताया जा रहा है कि शिंदे मुख्यमंत्री को लेकर होने वाली एनडीए की बैठक में अपने इन पांच दांव से सीएम पद के लिए सौदेबाजी कर सकते है। इनमें से शिंदे का अगर एक भी दांव लगता है तो बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
शनिवार को चुनाव परिणाम आने के साथ ही मुख्यमंत्री शिंदे ने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कामों का बखान किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि, हमारी सरकार के काम पर जनता ने मुहर लगाई है। शिंदे इस चुनाव में टोल फ्री, लाड़की बहिन जैसी योजना के जरिए चुनाव में उतरे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए योजनाओं को मजबूती से लागू किया था। ऐसे में इन मुद्दों को लेकर शिंदे भाजपा के साथ मजबूत से सौदेबाजी कर सकते है। शिंदे साफ कह सकते है कि अभी सरकार ठीक ढंग से चल रही है। जनता का भी समर्थन है। ऐसे में अगर इसके स्ट्रक्चर में अगर बदलाव किया जाता तो भविष्य में मुश्किलें बढ़ सकती है।
लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए ने महाराष्ट्र में उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया था। हालांकि शिंदे सेना ने बीजेपी के बराबर सीटें जीतने में कामयाब रही थी। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद शिंदे ने कहा कि, यह सरकार के काम को जनादेश है। ऐसे में कहा जा रहा है कि जब शिंदे मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा करेंगे तो इस बात को मजबूती से रख सकते हैं। शिंदे यह तर्क दे सकते हैं कि अगर मुख्यमंत्री बदला गया तो शिवसेना के कार्यकर्ता भी आहत होंगे और भविष्य में इसका असर बुरा हो सकता है। दरअसल, इस चुनाव में मुख्यमंत्री रहते ही शिंदे सभी को साध रहे थे। उनके समर्थक लगातार उनके कामों को बेहतर बता रहे थे और उसी के नाम पर जनादेश मांग रहे थे।
एनसीपी नेता अजित पवार भले अभी एनडीए में हैं। लेकिन उनका भरोसा करना मुश्किल है। क्योंकि 2019 से लेकर अब तक अजित पवार तीन बार यूटर्न ले चुके है। अजित पवार की विचाराधारा भाजपा और शिंदे शिवसेना से मेल नहीं खाती है। कई बार वे भाजपा और शिंदे सेना के बयानों से इतर बयान भी दे चुके है। विधानसभा चुनाव के दौरान ही अजित और देवेंद्र फडणवीस के बीच तनातनी देखने को मिली थी। यहीं नहीं अजित पवार पर फडणवीस ने हिंदुत्व विरोधियों के साथ रहने का आरोप लगा दिया था। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद के लिए इसे भी एक मुद्दा बना सकते थे। क्योंकि शिंदे की विचारधारा भाजपा से मिलती है। ऐसे में अजीत पवार भरोसा करना किसी जोखिम से कम नहीं होगा।
इसके अलावा शिंदे सीएम पद के लिए भाजपा को 2022 का घटनाक्रम भी याद दिला सकते है। क्योंकि एकनाथ शिंदे ने भारतीय जनता पार्टी के लिए ही उद्धव ठाकरे से बगावत की थी। उस दौरान उन्होंने उद्धव ठाकरे के कई विधायक और सांसद तोड़े थे। इसके बाद उनके नेतृत्व में ही महाराष्ट्र में सरकार बनी थी। बाद में हुए उपचुनावों में भी शिंदे सेना को अच्छी जीत हासिल हुई थी। तभी से उद्धव गुट के नेता शिंदे पर उनके साथ विश्वासघात करने और गद्दारी करने का आरोप लगाते है। यहीं नहीं, शिंदे भाजपा को समर्थन देने के नाम पर भी सौदेबाजी कर सकते हैं। भले ही भाजपा राज्य में बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। लेकिन पार्टी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में भाजपा को सरकार बनाने के लिए शिंदे सेना की जरूरत होगी। क्योंकि 2019 में बहुमत न मिलने की वजह से ही बीजेपी सरकार बनाने से चूक गई थी।
मिलकर तय होगा सीएम चेहरा
चुनावी परिणाम पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे कहते हैं कि हम लोगों ने जिस तरह मिलकर चुनाव लड़ा है, ठीक उसी तरह मिलकर नए सीएम का चेहरा तय कर लिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत शीर्ष हाईकमान जल्द ही इस संबंध में फैसला लेगा। मुख्यमंत्री सीएम शिंदे ने कहा कि तीनों पार्टी (भाजपा+शिवसेना-शिंदे+NCP-अजित) मिलकर तय करेंगे कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। उन्होंने कहा, मैं महाराष्ट्र के मतदाताओं को धन्यवाद देता हूं। यह एक प्रचंड जीत है। मैंने पहले ही कहा था कि महायुति को प्रचंड जीत मिलेगी। मैं समाज के सभी वर्गों को धन्यवाद देता हूं। मैं महायुति पार्टियों के सभी कार्यकर्ताओं को भी धन्यवाद देता हूं।