मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना : सूरत में 260 मीटर पीएससी ब्रिज का निर्माण पूरा
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत गुजरात में निर्माणाधीन नेशनल एक्सप्रेसवे के ऊपर 260 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) ब्रिज का निर्माण पूरा कर लिया गया है। राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचएसआसी) की ओर से सोमवार को बताया गया है कि यह ब्रिज सूरत जिले के कोसम्बा के पास दिल्ली-मुंबई नेशनल एक्सप्रेसवे-4 को क्रॉस करेगा।
एनएचएसआरसी के एक अधिकारी ने बताया कि यह परियोजना के लिए पांचवां पीएससी ब्रिज है। इसमें 104 प्रीकास्ट सेगमेंट का इस्तेमाल किया गया है। यह 50 और 80 मीटर के चार स्पैन वाला है। इसका निर्माण बैलेंस्ड कैंटिलीवर विधि से किया गया, जो बड़े स्पैन के लिए आदर्श मानी जाती है। नया ब्रिज सूरत और भरूच के बीच है। इसके निर्माण कार्य के िलए वाहनों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ ट्रैफिक प्रवाह को बिना रोके पूरा किया गया।
रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए सेमीकंडक्टर नीति महत्वपूर्ण- नौसेना प्रमुख
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने सोमवार को कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर नीति रक्षा उत्पादन को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निजी क्षेत्र से आगे आने का आह्वान किया। यहां एक कार्यक्रम में बोलते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यह नीति मूल रूप से अर्थव्यवस्था के लिए ग्रीस का काम कर रही है।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, रक्षा मंत्रालय ने इस साल इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स) योजना के लिए 450 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) को नवाचार करने में मदद करना है। रक्षा मंत्रालय ने हमारे आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत रक्षा उद्योग के लिए आरक्षित किया है। यह लगभग एक लाख करोड़ रुपये है। इसमें से 25 प्रतिशत इस बजट में निजी रक्षा उद्योग के लिए आरक्षित किया गया है। इस साल आईडेक्स योजना के लिए 450 करोड़ रुपये सफलतापूर्वक आवंटित किए गए हैं। 2018 में शुरू होने के बाद से आईडेक्स ने लगभग 400 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, सेमीकंडक्टर नीति से विशेष रूप से प्रौद्योगिकी-संचालित नौसेना के लिए सकारात्मक उम्मीदें हैं। यह नई नीति निश्चित रूप से नागरिक और रक्षा दोनों क्षेत्रों को लाभान्वित करेगी। नई नीतियां छोटी परियोजनाओं के लिए 1.5 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करती हैं, जबकि आदिति योजना नवीन प्रौद्योगिकियों के लिए 25 करोड़ रुपये तक का वित्तपोषण प्रदान करती है।