महाराष्ट्र विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हो रहे चुनाव से पहले महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में खींचतान खुलकर सामने आ गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्वयं चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है और इस सीट पर विधान परिषद में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे को उम्मीदवार घोषित किया है। विधान परिषद की 9 सीटों सहित एक सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है जबकि नामांकन पत्र वापसी की तिथि 4 मई है। इसलिए उद्धव ठाकरे ने बुधवार को अपने उम्मीदवार की घोषणा की। अंबादास दानवे बृहस्पतिवार को नामांकन दाखिल करेंगे। शरद पवार की पार्टी एनसीपी (एसपी) ने शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन किया है लेकिन, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि कांग्रेस भी इस चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगी। कांग्रेस के इस रुख से विपक्षी गठबंधन के भीतर मतभेद की चर्चा तेज हो गई है और असहमति खुलकर सामने आ रही है।
पवार परिवार एकजुट रहेगा: सुप्रिया सुले
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पवार परिवार कल भी एकजुट था, आज भी एकजुट है और कल भी भी एकजुट रहेगा। उन्होंने कहा, राजनीति व परिवार को कभी भी एक नहीं समझा जाना चाहिए। मैं अपने पारिवारिक संबंधों को महत्व देती हूं और मेरी उनके खिलाफ कभी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं..न तो पिछले चुनाव में, न ही 2029 में। मेरा मकसद देश की सेवा करना है, चाहे मुझे कहीं भी प्रतिनिधि के रूप में चुना जाएं।
उन्होंने कहा, अंदरूनी कलह केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को चोट पहुंचाती है। मैं कभी भी अपने कार्यों से उन्हें कष्ट नहीं होने दूंगी। सार्वजनिक मुद्दों पर मेरा फोकस स्पष्ट है। महाराष्ट्र के सार्वजनिक परिवहन में असली बदलाव की जरूरत है। केवल नियम और कानून ही पर्याप्त नहीं हैं। हमें आधुनिक, विश्वसनीय और समय पर चलने वाले टैक्सी, रिक्शा और बसों की जरूरत है। गणवत्ता बढ़नी चाहिए। मानक बेहतर होने चाहिए और सेवाएं समय पर चलनी चाहिए।
पर्यटक बन ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे थे 3 अमेरिकी, अब छोड़ेंगे देश
पुणे। भारत घूमने आए अमेरिका के तीन नागरिकों को पर्यटक वीजा की शर्तों के उल्लंघन पर भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया गया है। इन तीनों पर पुणे में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने का आरोप है, जो पर्यटक वीजा के नियमों के विरुद्ध है। अधिकारियों ने बताया कि ये तीनों 19 से 21 अप्रैल के बीच पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और धार्मिक प्रचार में जुटे थे। मामले का पता तब चला जब इन तीनों ने एक कैब चालक को अंग्रेजी, हिंदी और मराठी भाषा में छपे पर्चे दिए और धार्मिक विचारों से उसे प्रभावित करने की कोशिश की।