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Maharashtra: NCP और प्रशांत किशोर की 'नजदीकी' को सांसद सुप्रिया सुले ने आंतरिक मामला बताया

Sun, 09 Aug 2026 03:27 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
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महाराष्ट्र की बड़ी खबरें - फोटो : अमर उजाला
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शरद पवार की बेटी और राजनीतिक दल- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार या NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शनिवार को कहा कि अजित पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट का राजनीतिक रणनीतिकार रह चुके प्रशांत किशोर के साथ काम करना उनका आंतरिक मामला है। सुले ने कहा कि प्रशांत किशोर उनके अच्छे निजी दोस्त हैं। किशोर ने हाल ही में बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। बारामती सांसद ने कहा कि वह किशोर के काम को करीब से देखती रही हैं और अपनी दोस्ती नहीं छिपाई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किशोर पेशेवर रूप से स्वतंत्र होकर काम करते हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में किशोर ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख सुनैना पवार और उनके बेटे, सांसद पार्थ पवार से मुलाकात की थी। सुले ने बिहार में किशोर के राजनीतिक काम की प्रशंसा की। भाजपा की मजबूत राजनीतिक मशीनरी के बावजूद किशोर ने बांकीपुर में बड़ी लड़ाई जीती। सुले ने प्रशांत किशोर की सराहना की और उन्हें मेहनती बताया।

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एक्स-गर्लफ्रेंड और उसकी बहन से परेशान युवक ने की आत्महत्या
महाराष्ट्र के मुंबई में 24 साल के एक युवक ने आत्महत्या कर ली। एक्स-गर्लफ्रेंड और उसकी बहन के झूठे पुलिस केस में फंसाने की धमकी से परेशान युवक बांद्रा के पश्चिमी इलाके में 13वीं मंजिल के अपने फ्लैट से कूद गया। पुलिस ने रविवार को बताया कि युवक की मौत के बाद छह अगस्त को उसकी मां की शिकायत पर पुलिस ने दोनों महिलाओं के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है।

पुलिस के मुताबिक, युवक बांद्रा ईस्ट में अपने माता-पिता और छोटे भाई के साथ रहता था। मृतक के दोस्तों ने छह मई को उसकी मां को फोन कर उसके बंगलूरू की एक्स-गर्लफ्रेंड और उसकी बड़ी बहन के युवक को झूठे पुलिस केस में फंसाने की धमकी देनी की बात बताई। इस बातचीत के दौरान ही मां के पूछने पर युवक ने धमकी की बात कबूल की और खुद को बेडरूम में बंद कर खिड़की से छलांग लगा दी। युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पर्यावरण को नुकसान की जड़ में ‘वैचारिक प्रदूषण’- पूर्व SC जज अभय ओका
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अभय ओका ने कहा कि पर्यावरण को हो रहे नुकसान की सबसे बड़ी वजह ‘वैचारिक प्रदूषण’ है। उन्होंने कहा कि लोगों में नागरिक जिम्मेदारियों को लेकर जागरूकता की कमी, प्रकृति के प्रति घटती संवेदनशीलता और कानूनों का पालन नहीं करने की प्रवृत्ति से पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंच रहा है।

ओका शनिवार को लातूर के दयानंद लॉ कॉलेज में आयोजित ‘न्याय संवाद: कानून, पर्यावरण और नागरिक’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। वह कॉलेज में नए सेमिनार हॉल के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भी थे। उन्होंने कहा कि हवा, पानी और ध्वनि प्रदूषण के अलावा एक ऐसा प्रदूषण भी है, जो दिखाई नहीं देता। इसे वैचारिक प्रदूषण कहा जा सकता है और यही दूसरे तरह के पर्यावरणीय नुकसान की जड़ में है। नागरिकों को संविधान के तहत प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार मिला है, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूकता की कमी के कारण समाज इसका लाभ नहीं उठा पा रहा है।
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