मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित एक लग्जरी मॉल में बंदूक और फर्जी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहचान पत्र लेकर घुसने के आरोप में गिरफ्तार दो लोगों को अदालत ने जमानत दे दी है। यह मामला जियो वर्ल्ड प्लाजा में सात सितंबर को हुई घटना से जुड़ा है। पुलिस ने इस मामले में रोहन पारिख और उसके सहयोगी दिलीप कुंडे को गिरफ्तार किया था। अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के नकद बॉन्ड पर जमानत दी है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डीएस खेडेकर ने सोमवार को दोनों को जमानत दी। अदालत का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं हुआ है। घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास स्थित नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में शामिल होने से एक दिन पहले हुई थी। आरोप है कि दोनों मॉल में प्रवेश कर रहे थे, तभी सुरक्षा गार्डों ने कुंडे के पास बंदूक देख ली। इसके बाद दोनों की सुरक्षा कर्मियों से बहस हुई। इसी दौरान उनमें से एक ने ऐसी पहचान पत्र की तस्वीर दिखाई, जिसमें दावा किया गया था कि वह प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा है।
मॉल में आखिर क्या हुआ था?
पुलिस के अनुसार, सात सितंबर को रोहन पारिख और दिलीप कुंडे जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। सुरक्षा जांच के दौरान कुंडे के पास बंदूक मिलने पर दोनों को रोक लिया गया। इसके बाद दोनों ने सुरक्षा गार्डों से बहस शुरू कर दी। इसी दौरान उनमें से एक ने कथित तौर पर PMO का पहचान पत्र होने का दावा करते हुए उसकी तस्वीर दिखाई। घटना ऐसे समय हुई, जब अगले दिन पास के नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में शामिल होने का कार्यक्रम था।
रोहन पारिख ने जमानत के लिए क्या दलील दी?
रोहन पारिख ने अपने वकील सतीश मानेशिने के माध्यम से जमानत याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि वह निजी काम से मॉल गया था और उसे किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के आने या नए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी होने की जानकारी नहीं थी। याचिका में इस घटना को ऐसा मामला बताया गया, जिसमें किसी व्यक्ति को नुकसान या चोट नहीं पहुंची। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पारिख छात्र से पेशेवर जीवन की ओर बढ़ने के दौर में है और लंबे समय तक हिरासत में रहने से उसके भविष्य और करियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
पुलिस को पारिख के घर से क्या मिला था?
पुलिस ने रिमांड के दौरान अदालत को बताया था कि पारिख के घर की तलाशी में पीएमओ से जुड़े कई फर्जी दस्तावेज मिले। पुलिस के अनुसार, इन दस्तावेजों को चैटजीपीटी की मदद से तैयार किया गया था। पुलिस ने यह भी दावा किया कि पारिख ने फर्जी पीएमओ पहचान पत्र और उससे जुड़े आधिकारिक दस्तावेज तैयार करने की बात स्वीकार की थी। पुलिस के मुताबिक, वह 2025 से ऐसे दस्तावेज तैयार कर रहा था। पुलिस ने कहा कि इनका उद्देश्य परिवार और सामाजिक दायरे में अपनी पहचान और प्रतिष्ठा बढ़ाना तथा अपना आत्मविश्वास बढ़ाना था।
दोनों आरोपियों को अब किस आधार पर मिली जमानत?
अदालत ने मुख्य आरोपी रोहन पारिख और उसके सहयोगी दिलीप कुंडे को 50-50 हजार रुपये के नकद बॉन्ड पर जमानत दी है। दोनों की गिरफ्तारी घटना के बाद हुई थी और करीब दो सप्ताह बाद अदालत ने उन्हें राहत दी। हालांकि, अदालत के विस्तृत जमानत आदेश की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं हुई है। इसलिए जमानत देते समय अदालत ने किन विशेष कारणों को आधार बनाया, यह विस्तृत आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों आरोपी इस मामले में जमानत पर बाहर रहेंगे और उनके खिलाफ जांच से जुड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।