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Maharashtra: तहसीलदार को सरकारी कुर्सी पर बैठकर गाना पड़ा भारी, सोशल मीडिया पर वायरल; आयुक्त ने किया निलंबित

Sun, 17 Aug 2025 06:02 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र के नांदेड जिले के तहसीलदार प्रशांत थोरात को विदाई समारोह के दौरान सरकारी कुर्सी पर बैठकर बॉलीवुड गाना गाने के चलते निलंबित कर दिया गया। उनका गाना गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद आलोचनाएं शुरू हो गईं। नांदेड कलेक्टर की रिपोर्ट पर संभागीय आयुक्त जितेंद्र पापलकर ने निलंबन का आदेश जारी किया।
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सरकारी कुर्सी पर बैठकर गाना गाने के कारण तहसीदार निलंबित। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाराष्ट्र में एक तहसीलदार को अपनी विदाई समारोह में बॉलीवुड गाना गाना महंगा पड़ गया। सरकारी कुर्सी पर बैठकर गाना गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने इसे अनुशासनहीनता माना और अधिकारी को निलंबित कर दिया। मामला नांदेड जिले के उमरखेड तहसील कार्यालय से जुड़ा है।
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तहसीलदार प्रशांत थोरात का तबादला नांदेड जिले के उमरी से लातूर जिले के रेणापुर में हुआ था। आठ अगस्त को उमरी तहसील कार्यालय ने उनके लिए विदाई समारोह का आयोजन किया। इसी दौरान उन्होंने अमिताभ बच्चन अभिनीत 1981 की फिल्म याराना का लोकप्रिय गीत ‘यारा तेरी यारी को’ गाया। स्टाफ तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ा रहा था। लेकिन इस दौरान वह आधिकारिक कुर्सी पर बैठे थे और पीछे लगे बोर्ड पर ‘तालुका मजिस्ट्रेट’ लिखा हुआ था।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
थोरात का गाना गाने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। कई लोगों ने इसे हल्के-फुल्के माहौल का हिस्सा माना, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी हरकत को अनुचित बताया। आलोचकों ने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का ऐसा व्यवहार प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है।
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कलेक्टर की रिपोर्ट और कार्रवाई
वायरल वीडियो सामने आने के बाद नांदेड कलेक्टर ने इसकी रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में कहा गया कि तहसीलदार का यह आचरण महाराष्ट्र सिविल सर्विस (कंडक्ट) रूल्स 1979 का उल्लंघन है और प्रशासन की छवि धूमिल करने वाला है। रिपोर्ट भेजे जाने के बाद उच्च अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया।
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निलंबन का आदेश जारी
मामले पर कार्रवाई करते हुए संभागीय आयुक्त जितेंद्र पापलकर ने शनिवार को तहसीलदार प्रशांत थोरात को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह आदेश छत्रपति संभाजीनगर से जारी किया गया। इस घटनाक्रम ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को यह संदेश दिया कि आधिकारिक पद और कुर्सी पर रहते हुए किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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