संजय राउत की मानहानि मामले में दायर याचिका पर सत्र अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। मेधा सोमैया ने उन पर 100 करोड़ के शौचालय घोटाले का झूठा आरोप लगाने का केस किया था। इस मामले में अदालत अब 23 फरवरी को अपना फैसला सुना सकती है।
मुंबई की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी मेधा सोमैया से जुड़े मानहानि केस का है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले में राउत को दोषी ठहराया था, जिसके खिलाफ उन्होंने यह अर्जी दी थी।
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कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
सुनवाई के दौरान संजय राउत खुद कोर्ट में मौजूद थे। वकीलों के मुताबिक, जज 23 फरवरी को अपना फैसला सुना सकते हैं। पिछले साल सितंबर में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राउत को मानहानि का दोषी मानते हुए 15 दिन जेल की सजा सुनाई थी और 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि, ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए सजा को फिलहाल रोक दिया गया था।
मेधा सोमैया ने आरोप लगाया था कि संजय राउत ने मीडिया में उनके और उनके पति के खिलाफ झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए। राउत ने उन पर मीरा-भायंदर नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय बनाने के नाम पर 100 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था।
बहस में क्या हुआ?
अंतिम बहस में राउत के वकील मनोज पिंगले ने कहा कि जिन लेखों की बात हो रही है, उनसे किसी की बदनामी नहीं हुई। वहीं, मेधा सोमैया के वकील लक्ष्मण कनाल ने दलील दी कि जांच रिपोर्ट से साफ हो गया है कि कोई घोटाला नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि यह काम 2007 में टेंडर के जरिए पांच संस्थाओं (एनजीओ) को मिला था। इसमें सोमैया से जुड़ा एक एनजीओ भी शामिल था। पूरे प्रोजेक्ट की कुल कीमत ही 22 करोड़ रुपये थी, इसलिए 100 करोड़ का घोटाला होना मुमकिन ही नहीं है।