महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार
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भीमा कोरेगांव युद्ध की ऐतिहासिक 202वीं बरसी के मौके पर बुधवार को पुलिस ने पुणे जिले के पेर्ने गांव में स्थित ‘जय स्तंभ’ पर कडे़ सुरक्षा प्रबंध किए। जिससे यह वार्षिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका। इस क्षेत्र में दो वर्ष पहले हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। दलितों के लिए गौरव के प्रतीक इस स्मारक पर दोपहर तीन बजे तक करीबन चार लाख लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार, राज्य के नवनिर्वाचित मंत्री नितिन राउत, जितेंद्र अहवाड़, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख प्रकश आंबेडकर जैसे नेताओं ने बुधवार सुबह ‘जय स्तंभ’ जाकर श्रद्धांजलि दी। एहतियात के तौर पर कोरेगांव भीमा और उसके आस-पास की इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई थीं।
अब तक कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं है। भीमा कोरेगांव की लड़ाई एक जनवरी 1818 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा पेशवाओं के बीच हुई थी। ब्रिटिश फौज में दलित सिपाही थे, जिन्होंने मराठा सेना को हराया था। 2018 में 200वीं बरसी पर यहां हिंसा भड़क गई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और कई घायल हुए थे।
पुणे के पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल ने बताया कि स्थानीय निवासी एक जनवरी, 2018 के जैसी घटना को टालने के लिए शांति का माहौल बनाने के लिए सहयोग कर रहे हैं। पुलिस ने इस बार सुरक्षा के जबरदस्त बंदोबस्त किए हैं। 10 हजार पुलिस अधिकारी, 500 सीसीटीवी और 15 ड्रोन लगाये गए। 163 लोगों को नोटिस जारी करके पुणे से बाहर रहने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही पुणे से लोगों को लाने-ले जाने के लिए 250 बसें चलाई गई और 50 रिजर्व में रखी गईं हैं। इस इंतजाम पर प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि कुछ लोग इस बार भी यहां दंगा फैलाना चाहते थे परंतु पुलिस ने जबरदस्त इंतजाम किए हैं।