कल महाराष्ट्र और झारखंड के चुनावी नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। अधिकांश चुनाव सर्वेक्षण एजेंसियों और सट्टा बाजार के अनुमान दोनों राज्यों में एनडीए का पलड़ा भारी रहने का अनुमान जता रहे हैं। महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के नेता बीडी चौबे कहते हैं कि इस बार की लड़ाई दिलचस्प है। भाजपा विधायकों के मामले में राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। अजीत पवार की एनसीपी को सबसे कम सीटें मिल सकती हैं। ऐसा हुआ तो देवा भाऊ (देवेन्द्र फडणवीस) का महाराष्ट्र में अड्डा जमेगा और उनका प्रमोशन (मुख्यमंत्री) की कुर्सी मिल सकती है। हालांकि, शरद पवार के नेता कहते हैं कि इतनी जल्दबाजी भी ठीक नहीं है।
एनसीपी शरद पवार गुट के अनिल देशमुख को भरोसा है कि सरकार महाविकास अघाड़ी की ही बनेगी। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेता नाना पटोले के भी कौशल का फैसला होना है। बालासाहब थोराट की टीम भी चुनाव नतीजे पर नजर गड़ाकर बैठी है। भाजपा के नेता चंद्रकांत पाटील से कई बार बात करने के प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिल पाई।
वहीं सुरेन्द्र निंबालकर की टीम ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजे की नब्ज पकड़ने के लिए काफी मेहनत की है। सुरेन्द्र निंबालकार कहते हैं कि भाजपा के नेताओं ने चुनाव में काफी होम वर्क किया था। उनकी रणनीति भी अच्छी ही कही जाएगी। निंबालकर का कहना है कि चुनाव से कुछ समय पहले ही लाड़ला भाई और लाड़ला बहना योजना का भाजपा को अच्छा लाभ मिल सकता है। भाजपा की तुलना में एकनाथ शिंदे की शिवसेना इससे वंचित रह सकती है। निंबवालकर कहते हैं कि विधानसभा चुनाव में एकनाथ शिंदे की तुलना में उद्धव ठाकरे की पार्टी का पलड़ा भारी है।
अजित पवार का क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है। बीडी चौबे कहते हैं कि अजीत पवार की पार्टी के एक दहाई प्रत्याशी जीत जाएं तो बड़ी बात है। सुरेन्द्र निंबालकर भी बीडी चौबे की बात का समर्थन करते हैं। अर्जुन यादव शिवसेना (उद्धव) के नेता हैं। वह कहते हैं कि अजीत पवार के राजनीतिक कैरियर को बड़ा नुकसान हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि शरद पवार की पार्टी को बहुत अधिक सीटें आने की संभावना है। अर्जुन का कहना है कि जमीन इस बार कांटे की लड़ाई हुई है। अर्जुन कहते हैं कि शरद पवार की पार्टी जहां छठवें नंबर पर रह सकती है, वहीं शरद पवार का दल तीसरे या चौथे नंबर पर रह सकता है।
शरद पवार, उद्धव ठाकरे या फिर देवेन्द्र फडणवीस?
शरद पवार चुनावी राजनीति उतरने से दूरी बना रहे हैं। अब उनकी विरासत सुप्रिया सूले संभालेंगी। इसलिए इस बार का विधानसभा चुनाव उनके लिए सबसे अधिक अहम है। निंबालकर पार्टी को अच्छी संख्या में सीटें आई तो शरद पवार का महाराष्ट्र में रसूख बना रहेगा। 25 नवंबर से आरंभ हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में उनके कद का असर दिखाई देगा। दूसरे नंबर पर उद्धव ठाकरे हैं। उनके सामने अब मनसे के राज ठाकरे होने से बचने की चुनौती खड़ी है। यह तभी संभव है, जब शिवसेना (उद्धव) चार दर्जन के करीब सीटें लेकर आए।
दो नेताओं की नाक के बाद तीसरे नेता देवेन्द्र फडणवीस हैं। फडणवीस के महाराष्ट्र की राजनीति में दोस्त और दुश्मन बराबर हैं। फडणवीस ही वह नेता हैं, जिन्होंने दो बार अजित पवार को अपने खेमे में लाने में सफलता पाई। एक बार शिवसेना को तोड़कर एकनाथ शिंदे को साथ लेकर आए, लेकिन राज्य में सरकार बनने पर वह उपमुख्यमंत्री बना दिए गए। एकनाथ शिंदे के मंत्रिमंडल के एक बड़े भाजपा नेता का कहना है कि देवेन्द्र ने जितना पार्टी को दिया, उससे कहीं अधिक गुटबाजी बढ़ाई। जब तक वह महाराष्ट्र में रहेंगे, ऐसा होगा। देवेन्द्र फडणवीस अभी महाराष्ट्र की राजनीति छोड़ना नहीं चाहते। ऐसे में माना जा रहा है कि यह चुनाव उनके लिए भी नाक का सवाल है।