संजय राउत, शिवसेना यूबीटी के नेता
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शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत द्वारा बागी सांसदों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर सफाई दी है। हालांकि राउत ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा है कि मराठी भाषा में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल आम है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि कब और कहां किस भाषा का इस्तेमाल करना है। राउत का कहना है कि उन्होंने संसद के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया।
क्या बोले संजय राउत और क्यों देनी पड़ी सफाई?
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि हम मराठी भाषा में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इसमें गलत क्या है? मुझे अच्छी तरह पता है कि कब और कौन सी भाषा का इस्तेमाल करना है। जो भाषा व्यक्ति समझता है, उसके लिए उसी भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह लंबे समय से पत्रकार और संपादक रहे हैं, इसलिए उन्हें भाषा की मर्यादा और उसका उपयोग अच्छी तरह मालूम है। राउत ने जोर देकर कहा कि उन्होंने संसद में कभी ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया।
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क्या बागी नेताओं पर साधा निशाना?
संजय राउत ने अपने बयान में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कोई अगर बेईमानी करता है तो उससे क्या करेंगे? कोई भ्रष्टाचार करता है, 15-15 करोड़ रुपये लेकर पार्टी छोड़ता है तो उनके बारे में आप क्या कहेंगे? क्या उनके ऊपर फूलों की बरसात करेंगे? राउत का यह बयान उन नेताओं की ओर इशारा माना जा रहा है जिन्होंने शिवसेना में बगावत कर अलग रास्ता चुना था। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी भाषा का इस्तेमाल असामान्य नहीं है।
क्या संसद की मर्यादा पर उठे सवालों का दिया जवाब?
राउत से जब पूछा गया कि इस तरह की भाषा संसदीय परंपराओं और राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ मानी जा सकती है, तो उन्होंने कहा कि संसद और सार्वजनिक मंचों की मर्यादा का उन्हें पूरा ध्यान रहता है। उन्होंने दोहराया कि संसद में उन्होंने कभी इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। उनके अनुसार किसी व्यक्ति के व्यवहार और परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया दी जाती है और हर जगह एक जैसी भाषा नहीं बोली जाती।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल बागी सांसदों पर राउत मीडिया से बात कर रहे थे, उसी समय उन्होंने बागी सांसदों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। वो सांसदों को तोड़ने के लिए 15-15 करोड़ रुपये की पेशकश करने वाली बात कर रहे थे। राउत ने यह भी कहा था अगर कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो पहले अपने पद से इस्तीफा दे और फिर जनता के बीच जाकर नया जनादेश हासिल करे। इस बीच सांसद अरविंद सावंत ने संभावित दल-बदल की आशंका को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा है। हालांकि अब तक किसी सांसद ने आधिकारिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें...
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