आदित्य ठाकरे ने मराठवाड़ा में की 'शिव संवाद यात्रा' के 7वें संस्करण की शुरुआत
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने सोमवार को पार्टी की शिव संवाद यात्रा के सातवें संस्करण की शुरुआत की। इस यात्रा के दौरान वह मराठवाड़ा के तीन जिलों का दौरा करेंगे। इस संदर्भ में पार्टी ने एक विज्ञप्ति भी जारी की है। इसके मुताबिक, आदित्य ठाकरे दिन में मुब्धेगांव, वडगांव पिंगला, सिन्नार और पालसे गांवों का दौरा करेंगे और नासिक में पार्टी की एक बैठक को संबोधित करेंगे।
वैजापुर (औरंगाबाद) के रास्ते मराठवाड़ा में प्रवेश करने से पहले शिवसेना नेता मंगलवार को नासिक जिले के चंदोरी, विंचुर और नंदगांव जाएंगे।
यह यात्रा बुधवार को जालना के सोम्थाना, राम नगर, घनसावंगी और इसके बाद बीड में जिओराई से होकर गुजरेगी और गुरुवार को पैठन के बिडकिन, औरंगाबाद के पटोडा और औरंगाबाद जिले के खुल्ताबाद के नंदराबाद में समाप्त होगी।
राकांपा नेता ने कसा तंज
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता आनंद परांजपे ने सोमवार को कल्याण लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे का एक पुलिस थाने में जन्मदिन मनाने और वहां पुलिसकर्मियों को वर्दी बांटने पर आपत्ति जताई। दरअसल, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे शिंदे ने 4 फरवरी को क्षेत्र के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यहां एक पुलिस स्टेशन में अपना जन्मदिन मनाया था।
तंज कसते हुए एनसीपी नेता ने कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो गृह विभाग के प्रमुख हैं, और राज्य के पुलिस महानिदेशक रजनीश सेठ को इस तरह के समारोहों को एक नियम बनाना चाहिए ताकि कर्मियों को मुफ्त और समय पर वर्दी मिल सके।
'राज्य सरकार के असहयोग के कारण उद्योग और परियोजना महाराष्ट्र आने के नहीं थे इच्छुक'
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को कहा कि जो उद्योग महाराष्ट्र आने के इच्छुक नहीं थे और हाल के दिनों में उन्होंने अपना परिचालन कहीं और स्थानांतरित कर दिया था, उन्होंने तत्कालीन राज्य सरकार के असहयोग के कारण ऐसा किया और उन्हें नहीं पता था कि बदलाव होने वाला है।
शिंदे सरकार पिछले साल जून में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह के बाद सत्ता में आई थी, जिसने शिवसेना को भी विभाजित कर दिया था। उनकी सरकार में बालासाहेबांची शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी शामिल हैं।
महाराष्ट्र में तबसे सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दलों के बीच मेगा परियोजनाओं को लेकर टकराव देखा जा रहा है। कई मेगा परियोजनाओं ने अन्य राज्यों में अपना बेस स्थापित करने का विकल्प चुना है। इनमें वेदांता-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर परियोजना और टाटा-एयरबस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी शामिल थे, दोनों पड़ोसी राज्य गुजरात चले गए।शिंदे ने कहा, राज्य छोड़ने वाले कुछ उद्योगों ने ढाई साल में तत्कालीन (महा विकास अघाड़ी) सरकार द्वारा असहयोग के कारण ऐसा किया। ये उद्योग इस बात से अनजान थे कि यहां की सरकार बदलने वाली है।