एनसीपी का एक धड़ा था नाराज
एनसीपी में इस फूट की सबसे बड़ी वजह एक धड़े की अनदेखी को माना जा रहा है। बीते दिनों शरद पवार के पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद से शुरू हुए नाटक के बाद जिस तरह से प्रफुल्ल पटेल और बेटी सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इससे पार्टी का एक धड़ा नाराज चल रहा था। अजीत पवार के समर्थक विधायक पवार के इस फैसले से नाराज थे। पहली बार जब 2 मई को शरद पवार ने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ा था तो इस बात की संभावना थी कि अजित पवार को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है। जब पार्टी नेताओं और समर्थकों ने पवार के फैसले का विरोध किया तो अजित ने खुलेआम कहा था कि इस विरोध से कुछ नहीं होगा। पवार साहब अपना फैसला नहीं बदलेंगे। हालांकि 4 दिन में ही पवार ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। वे जब इस बात की जानकारी मीडिया को देने आए तो अजित पवार वहां मौजूद नहीं थे। तब इस बात की चर्चा थी कि अजित शरद पवार के फैसले से नाराज हैं।
दूसरी घटना हाल ही में पार्टी संगठन में हुए फेरबदल को लेकर है। शरद पवार ने 10 जून यानी पार्टी के 25 वें स्थापना दिवस पर बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष समेत विभिन्न राज्यों का प्रभार दे दिया। इसके बाद अजित पवार की नाराजगी की खबरें सामने आईं। हालांकि, उन्होंने इससे इंकार किया था। शरद पवार ने यह भी कहा था कि अजित पवार पहले से ही विपक्ष के नेता के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे महाराष्ट्र राज्य देखेंगे।
अब क्या करेंगे शरद पवार
प्रदेश के राजनीतिक जानकार प्रो. एमआर शिंदे का कहना है कि अजीत पवार का पुराना सपना था कि वह भाजपा के साथ सरकार में शामिल हो। आखिरकार उनका ये सपना रविवार को पूरा हो गया हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में अब यह खेल बहुत लंबा चलेगा, क्योंकि शरद पवार इस घटना को लेकर बोल चुके हैं कि विधायक कहीं भी जा सकते हैं। लेकिन पार्टी कहीं नहीं जाएगी। अजीत पवार ने विधायकों की बैठक की है। यह बैठक पार्टी की आधिकारिक बैठक नहीं थी। अब एनसीपी किसकी होगी यह लड़ाई देखने लायक होगी।
शिंदे कहते हैं कि एनसीपी के पास अब राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा नहीं हैं। अब वह केवल एक क्षेत्रीय पार्टी बनकर रह गई है। सवाल उठने लगे हैं कि अजीत पवार भी क्या एकनाथ शिंदे की तरह पार्टी के चुनाव चिन्ह और पार्टी के हक की लड़ाई लडेंगे। क्योंकि वह प्रेस कांफ्रेस में साफ कर चुके हैं कि हम लोग एनसीपी के चुनाव चिन्ह के लिए लड़ेंगे। पार्टी के सभी नेता हमारे पास हैं। एक फार्मूला यह भी हो सकता है कि शरद पवार चुपचाप अजित पवार के इस फैसले को स्वीकार कर लें। हालांकि इसकी संभावना बहुत कम नजर आ रही है। शरद पवार इस स्थिति से निपटने के लिए नागालैंड के फार्मूले को भी अपना सकते हैं। नागालैंड में भाजपा स्थानीय दलों के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार चला रही है। बावजूद इसके एनसीपी के चार विधायक भाजपा समर्थित सरकार को समर्थन दे रहे हैं।
अजित पवार भी प्रेस कांफ्रेंस में दोहरा चुके है नागालैंड फार्मूला
अब अजित पवार ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी, 'नागालैंड मॉडल' का जिक्र किया है। अजित पवार ने कहा कि हम बीजेपी गठबंधन वाली सरकार का नागालैंड में समर्थन कर सकते हैं तो फिर महाराष्ट्र में क्यों नहीं कर सकते हैं। जिस तरह नागालैंड में एनडीपीपी नेता नेफ्यू रियो के नेतृत्व वाली सरकार में बीजेपी शामिल है। ठीक उसी तरह के हालात महाराष्ट्र में भी हैं। महाराष्ट्र में भले ही बीजेपी बड़ी पार्टी हैं लेकिन सरकार का नेतृत्व शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे कर रहे हैं और बीजेपी इस सरकार में शामिल हैं। अब अजीत पवार ने इसी मॉडल की आड़ लेते हुए कहा कि यहां भी समर्थन देने में क्या हर्ज है।
दरअसल, नागालैंड में इसी साल विधानसभा चुनाव हुए थे। 60 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत ( 37 सीटें ) मिला और नेफ्यू रियो के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। बाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने नागालैंड में एनडीपीपी-भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने की घोषणा की जिसके सात विधायक चुनकर आए थे। तब पार्टी प्रमुख शरद पवार ने नागालैंड के व्यापक हित में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के नेतृत्व को स्वीकार करने का फैसला किया था। शरद पवार ने कहा था कि उनकी पार्टी ने बीजेपी को नहीं बल्कि नागालैंड के मुख्यमंत्री का समर्थन किया है जो एनडीपीपी से हैं।
शरद पवार ने कहा, पहले भी देख चुका हूं बगावत
घटनाक्रम के बाद शरद पवार ने पुणे में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि, पहले भी ऐसी बगावत हो चुकी है। लेकिन मैं फिर से पार्टी खड़ी करके दिखाऊंगा। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया था कि महाराष्ट्र के मुख्य सहकारी बैंक में भारी भ्रष्टाचार है। हालांकि सरकार में शामिल हुए नेता बताते हैं कि भ्रष्टाचार का मामला अब साफ हो गया है और इसके लिए वो पीएम को धन्यवाद देते हैं। अगले कुछ दिनों में लोगों को पता चल जाएगा कि इन एनसीपी नेताओं ने हाथ क्यों मिलाया है। जो लोग शामिल हुए हैं उन्होंने मुझसे संपर्क किया है और कहा है कि उन्हें बीजेपी ने आमंत्रित किया है, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका रुख अलग है।