चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र में कभी मनोनीत एमएलसी मुख्यमंत्री नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य का चुनाव जीतना पड़ेगा। इसके बाद फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इससे पहले पृथ्वीराज चव्हाण जब राज्य के मुख्यमंत्री बने थे, तब उनके सामने भी यह कठिनाई आई थी।
उन्हें जब कोई अवसर नहीं मिला तो वह कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य संजय दत्त का इस्तीफा लेकर चुनाव लड़े और चुने गए। दूसरी अड़चन यह है कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दो महीने पहले ही एनसीपी के दो सदस्यों को मनोनीत करने का प्रस्ताव वापस भेज दिया था। यदि उद्धव को मनोनीत किया जाता है तो इसके खिलाफ मामला कोर्ट में जा सकता है।
महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व प्रधान सचिव अनंत कलसे का कहना है कि उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने में कानूनी पेच तो है ही। लेकिन, यह पूरी तरह से राज्यपाल के विवेक पर निर्भर है। यदि राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को विधान परिषद सदस्य मनोनीत कर दिया तो उनको समय मिल जाएगा। क्योंकि इसमें भी दो चीजें हैं। एक तो कुछ लोग कहते हैं कि उद्धव को 6 साल का टर्म मिल सकता है।
वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें 6 जून तक का ही कार्यकाल मिल पाएगा। फिर भी 6 जून 2020 तक ही सही, यदि उद्धव ठाकरे तब तक के लिए एमएलसी बन गए तो उसके बाद दूसरे विकल्प अपना सकते हैं। तब तक शायद करोना वायरस भी चला जाएगा। अभी तो हर हाल में उद्धव ठाकरे के लिए विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है। अन्यथा उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना ही होगा।