शरद पवार, उद्धव ठाकरे और नाना पटोले
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महाराष्ट्र में अगले साल बीएमसी सहित अन्य निकाय और विधानसभा चुनावों में अपना दम दिखाने के लिए कांग्रेस ने अभी से मोर्चेबंदी शुरू कर दी है। इससे महाविकास आघाड़ी सरकार में महाभारत शुरू हो गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अकेले में मुलाकात के बाद ही राज्य का राजनीतिक परिदृश्य बदला सा नजर आ रहा है। आघाड़ी सरकार के घटक दलों के बीच पिछले हफ्ते से जुबानी जंग जारी है। शनिवार को राहुल गांधी के जन्मदिन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के बाद गठबंधन में मतभेद सतह पर आ गया।
इस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने अकेले चुनाव लड़ने का दंभ भरा तो मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष भाई जगताप ने भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि अकेले लड़ेंगे, देखते हैं किस में कितना है दम। इस बयान ने शिवसेना को नाराज कर दिया।
शाम को शिवसेना के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, कोरोना काल में जो अकेले चुनाव लड़ने की बता कर रहे हैं, लोग उन्हें जूते से पीटेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि सभी पार्टियों को अपनी महात्वाकांक्षाओं को परे रखकर अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। उसके बाद से गठबंधन में घमासान मचा है। एनसीपी खुलकर शिवसेना के साथ आ गई है। प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि अगर, कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने की बात करती है तो एनसीपी और शिवसेना मिलकर चुनाव लड़ेगी।
भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए दिया समर्थन : पटोले
नाना पटोले ने कहा कि कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल हुई है। उन्होंने कहा है कि राज्य में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की एमवीए गठबंधन सरकार का गठन पांच साल के लिए हुआ है और यह कोई स्थायी गठजोड़ नहीं है। पटोले ने कहा कि हर पार्टी को अपने संगठन का विस्तार करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अकेले चुनाव लड़ना कोई नई बात नहीं है। पहले भी कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़ चुकी हैं।