महाराष्ट्र संकट पर संविधान पीठ को विचार करने की जरूरत : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के कारण हुई राजनीतिक उथल-पुथल से संबंधित मामले में कई सांविधानिक सवाल उठे हैं। इन पर पांच सदस्यों की संविधान पीठ को विचार करने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर को अगले आदेश तक अयोग्यता याचिकाओं पर विचार नहीं करने और विधायी सचिव को सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा, कुछ मुद्दों पर एक बड़ी पीठ के निर्णय की आवश्यकता होगी। इसमें यह भी सवाल है कि क्या किसी पार्टी में ‘अल्पमत’ को बहुमत द्वारा की गई नियुक्तियों को भंग करने का अधिकार है? इस तरह के अन्य मुद्दों का निपटारा करना पड़ेगा। एक दूसरा सवाल यह है कि क्या होगा अगर एक मुख्यमंत्री को विधानसभा में नेता होने के बावजूद अपनी पार्टी का विश्वास हासिल नहीं है?
इन सब सवालों के जवाबों के लिए इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजना होगा। पीठ ने मामले के पक्षकारों की ओर से पेश वकीलों से उन मुद्दों को तय करने को कहा जिन्हें अदालत के समक्ष उठाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 1 अगस्त को सुनवाई करेगा।
दायर की गई हैं छह याचिकाएं
- सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अयोग्यता कार्यवाही, स्पीकर के चुनाव, पार्टी व्हिप की मान्यता और राज्यपाल द्वारा फ्लोर टेस्ट के आदेश से संबंधित छह याचिकाएं सुनवाई के लिए आई हैं। शीर्ष अदालत ने 11 जुलाई को महाराष्ट्र विधानसभा के नवनियुक्त स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाने को कहा था।
- एकनाथ शिंदे और 48 अन्य विधायकों के विद्रोह के बाद 29 जून को अदालत ने ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार के लिए 30 जून को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट आयोजित करने के महाराष्ट्र के राज्यपाल के निर्देश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था।