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Maharashtra Crisis: उद्धव सरकार से शिंदे गुट ने समर्थन वापसी का किया एलान, बागी मंत्रियों पर गिरी गाज

Mon, 27 Jun 2022 01:12 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

याचिका में कहा गया है कि शिवसेना के विधायक दल के 38 सदस्यों ने महा विकास अघाड़ी सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। ऐसे में एमवीए सरकार ने बहुमत खो दिया है। उधर, एकनाथ शिंदे के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। 
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एकनाथ शिंदे - फोटो : Social media
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विस्तार
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महाराष्ट्र की सियासत पर संकट के बादल छाए हुए हैं। आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई होनी है। इस बीच शिंदे गुट की ओर से बड़ा दावा किया गया है। शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अपनी याचिका में दावा किया है कि उनके पास 38 विधायकों का समर्थन है। उधर, उद्धव ठाकरे ने बागी मंत्रियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके विभाग वापस लेकर दूसरे मंत्रियों को दे दिए हैं। 

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याचिका में उन्होंने कहा है कि शिवसेना के विधायक दल के 38 सदस्यों ने महा विकास अघाड़ी सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। ऐसे में एमवीए सरकार ने बहुमत खो दिया है। दरअसल, एकनाथ शिंदे गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं। इसमें एकनाथ शिंदे को विधायक दल के नेता के पद से हटाने, विधायकों को नोटिस और डिप्टी स्पीकर द्वारा अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई है। 

ठाकरे ने नौ बागी मंत्रियों के विभाग अन्य मंत्रियों को आवंटित किए
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुवाहाटी के होटल में ठहरे हुए नौ बागी मंत्रियों के विभाग अन्य मंत्रियों को आवंटित कर दिए हैं।आधिकारिक बयान के अनुसार, बागी मंत्रियों के विभाग अन्य मंत्रियों को इसलिए दिए जा रहे हैं ताकि प्रशासन चलाने में आसानी हो ।
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महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में शिवसेना के नौ मंत्री अब एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो चुके हैं। शिवसेना में अब चार कैबिनेट मंत्री हैं जिनमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आदित्य ठाकरे, अनिल परब और सुभाष देसाई शामिल हैं।आदित्य को छोड़कर शेष तीन विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) हैं।

शिंदे गुट के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका 
उधर, महाराष्ट्र की आंतरिक व्यवस्था को अस्त-व्यस्त करने के आरोप में बॉम्बे हाईकोर्ट में एकनाथ शिंदे के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें उन पर महाराष्ट्र में 'राजनीतिक उथल-पुथल' मचाने और राज्य सरकार की आंतरिक व्यवस्था को अस्त-व्यस्त करने का आरोप लगाया गया है। जनहित याचिका में विद्रोही नेताओं के खिलाफ "कर्तव्यों का पालन नहीं करने और ऐसी अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए उचित कार्रवाई की मांग की गई है, जिससे जन अधिकारों और सुशासन का अनादर हुआ है।'

सात नागरिकों ने दायर की याचिका
महाराष्ट्र के सात निवासियों की तरफ से दायर याचिका में शिवसेना के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार को विस्तृत आश्वासन योजना प्रस्तुत करने का निर्देश देने की भी अपील की गई है, जिसमें कई मंत्रियों की अनुपस्थिति में शासन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई हो। अधिवक्ताओं असीम सरोदे और अजिंक्य उडाने के माध्यम से दायर याचिका में अदालत से बागी नेताओं को राज्य में लौटने और अपने कामकाज को फिर से शुरू करने का निर्देश देने की अपील की गई है। याचिका में कहा गया है कि बागी विधायक संविधान के तहत ली गई शपथ की अवहेलना कर रहे हैं।

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