फडणवीस ने कहा, 'राज्य सरकार अभी भी केंद्र की ओर से उपलब्ध कराई गई आर्थिक मदद भी खर्च नहीं कर पाई है। मैं यह समझ ही नहीं पा रहा हूं कि राज्य सरकार की प्राथमिकता क्या है, आज राज्य को सकारात्मक नेतृत्व चाहिए। मैं आशा करता हूं कि उद्धव ठाकरे उचित फैसले लेंगे।'
उन्होंने कहा कि कोविड-19 की गंभीर स्थिति को देखते हुए हमारी राज्य की सरकार को बदलने में रुचि नहीं है। हम कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ रहे हैं और इसके लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं। हम सरकार को गिराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, यह सरकार अपने बोझ से ही गिर जाएगी।
शरद पवार और भाजपा नेता राणे ने की थी राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकात
दरअसल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार और वरिष्ठ भाजपा नेता नारायण राणे की राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से सोमवार को अलग-अलग मुलाकात के बाद यहां राजनीतिक हलचल और तेज हुई है।
राज्य में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार को देखते हुए भाजपा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। वहीं कांग्रेस कह रही है कि भाजपा सत्ता से बाहर हो गई है और इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। साथ ही शिवसेना नेता संजय राउत कहते हैं कि सरकार मजबूत है, चिंता का कोई विषय नहीं है।
सरकार नहीं कर सकती कोरोना संकट का सामना, राष्ट्रपति शासन लगे : राणे
राणे का इस संबंध में कहना है कि सरकार विफल हो रही है। इस सरकार में कोरोना से सामना करने की क्षमता नहीं हैं। इसलिए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात के बाद राणे ने सेना बुलाने की भी बात कही।
उन्होंने सरकारी अस्पतालों की स्थिति का हवाला देते हुए कहा था कि हमने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि लोगों की जान बचाने, उनको सही इलाज देने के लिए महानगर पालिका और राज्य सरकार के अस्पतालों को सेना के हवाले कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के अस्पतालों की हालत खराब है।
पवार की मुलाकात पर एनसीपी का दावा, राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई
वहीं, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने भी सोमवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल से राज भवन में मुलाकात की थी। एनसीपी ने इसे लेकर कहा कि राज्यपाल के आमंत्रण पर यह मुलाकात हुई और बातचीत में कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा। एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह मात्र शिष्टाचार भेंट थी।