एनसीपी विधायकों को 700-800 करोड़ शिवसेना के विधायकों को 50-55 करोड़
शिवसेना के बागी विधायक महेश शिंदे ने दावा किया कि शिवसेना के विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 50 से 55 करोड़ रुपये की राशि दी गई, जबकि एनसीपी के विधायकों को 700 से 800 करोड़ रुपये मिले। यहां तक कि एनसीपी के उन विधायकों को भी ज्यादा पैसा दिया गया, जिन्हें पहले के चुनावों में शिवसेना नेताओं ने हराया था। शिवसेना के कई विधायकों को तो कार्यक्रमों में भी आमंत्रित नहीं किया जा रहा था।
संकट के बीच ठाकरे परिवार के पीछे खड़ी शिवसेना कार्यकारिणी, बैठक में पारित किए गए छह प्रस्ताव
शिवसेना में बगावत के बाद सत्ता और पार्टी की विरासत को बचाने में जुटी शिवसेना ने शनिवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक बुलाई। बैठक में कुल 6 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई और पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पर पूरा भरोसा जताते हुए उन्हें बागियों के खिलाफ कार्रवाई का सर्वाधिकार सौंप दिया गया। हालांकि बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे को शिवसेना नेता पद से हटाने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ।
शिवसेना भवन दादर में हुई इस बैठक में पार्टी के बागी विधायकों की निंदा की गई और मुख्यमंत्री के रूप में उद्धव ठाकरे कामकाज की प्रशंसा करते हुए अभिनंदन प्रस्ताव पारित हुआ। इसके साथ ही, मुंबई मे हुए विकास कार्यों के लिए उद्धव ठाकरे के पुत्र और राज्य सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे का भी अभिनंदन किया गया।
बागी गुट बोला- हमने पार्टी नहीं छोड़ी, शिंदे हमारे नेता
महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी सरकार को संकट में डालने वाले बागी शिवसेना विधायकों ने शनिवार को कहा कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है। बागी गुट के प्रवक्ता दीपक केसरकर ने कहा, हमारे पास दो तिहाई विधायक हैं और इसलिए एकनाथ शिंदे अब भी शिवसेना विधायक दल के नेता हैं।
पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ मतभेद की वजह भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर 2019 में एनसीपी और कांग्रेस के साथ जाने का उनका फैसला है। केसरकर ने कहा, गुवाहाटी जाने से पहले मैंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात की थी लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। हमने मुख्यमंत्री से उनका इस्तीफा नहीं मांगा था। हम तो केवल यही चाहते थे कि शिवसेना-भाजपा मिलकर सरकार बनाए, क्योंकि एनसीपी हमें खत्म कर रही है।