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महाराष्ट्र की फिसलनभरी पिच पर 20-20 स्टाइल से टेस्ट मैच खेल रहे हैं धुरंधर खिलाड़ी!

Mon, 25 Nov 2019 06:41 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार - फोटो : एएनआई
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महाराष्ट्र में 20-20 की स्टाइल में टेस्ट मैच चल रहा है। पिच बेहद फिसलनभरी है, लेकिन खिलाड़ी धुरंधर हैं। मराठा सरदार शरद पवार की राजनीतिक साख दांव पर है, तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का एक बार फिर सब कुछ दांव पर है। अजित पवार की ओपनिंग में भाजपा के चाणक्य और पार्टी अध्यक्ष केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोच और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुमति से लांग ऑफ पर छक्का जड़ दिया है।

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बॉल नौसिखिया खिलाड़ी उद्धव ठाकरे की उंगलियों को हवा देते हुए स्टेडियम के पार है। अहमद पटेल से हुई यह चूक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को समझ में आ रही है, लिहाजा अब आधे खिलाड़ी सावधान हैं।

अजित पवार और शरद पवार बस दो पहेली

पूरे खेल में बस दो पहेली बूझी जा रही हैं, एक शरद पवार की और दूसरी अजित पवार की। शरद पवार ने सोमवार 25 नवंबर को कहा कि अजित पवार शिवसेना के साथ 50-50 का फार्मूला चाहते थे और एनसीपी भी यही चाहती थी, लेकिन शिवसेना तैयार नहीं हुई। शरद पवार आगे कहते हैं कि वह शिवसेना के साथ बहुत आगे निकल चुके हैं और शिवसेना का पूरा साथ देंगे। इसके साथ-साथ एनसीपी के नेता छगन भुजबल लगातार अजित पवार को एनसीपी में लौटाने की अभी तक की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। इस कोशिश में शरद पवार के दूसरे भाई के पोते रोहित पवार समेत एनसीपी के कई नेता हैं।

अजित पवार ट्वीट करके कह रहे हैं कि उनके नेता शरद पवार हैं और रहेंगे। वह एनसीपी में हैं और रहेंगे। इसके सामानांतर एनसीपी ने अजीत पवार को विधायक दल के नेता, व्हिप जारी करने के अधिकार से वंचित कर दिया है, लेकिन राज्यपाल के पास या फिर देश की सर्वोच्च अदालत में इस तरह की तमाम जानकारियों को साझा करने में एनसीपी संभलकर चल रही है। इस पूरी धमा-चौकड़ी से भाजपा खुश है। संसद भवन में भाजपा के केंद्रीय मंत्री भी चर्चा में मुस्करा रहे हैं और संदेश दे रहे हैं कि पिच फिसलनभरी है।

खीझ अहमद पटेल की

अहमद पटेल को छन कर मिल रही जानकारियां परेशान कर रही हैं, लेकिन उनके पास खरी-खोटी सुनाने के अलावा कोई चारा नहीं है। पटेल को अहसास भी नहीं था कि अजित पवार ऐसा कर सकते हैं। शरद पवार को भी इसका इल्म नहीं हुआ कि अजित पवार इतनी तैयारी के साथ ऐसे बगावत कर जाएंगे? वह भी तब जब वह कुछ बिन्दुओं पर खिन्न चल रहे थे? अहमद पटेल के लिए यह पचा पाना मुश्किल है कि आखिर इसकी चर्चा तीनों दलों के बीच में ठीक ढंग से क्यों नहीं हुई?

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यह सामने आना चाहिए था कि अजित पवार 50-50 का फार्मूला चाहते हैं। फिर शरद पवार जैसा पारखी इसे समय रहते क्यों नहीं भांप पाया? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत अन्य को परेशान कर रहे हैं।

उद्धव ठाकरे चूक गए

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार महाराष्ट्र की महाभारत में सेना परिवार जहां धुरी बना है, वहीं कांग्रेस सुरक्षित खेल रही है। दूसरे छोर पर भाजपा आक्रामक है। जबकि शिवसेना की स्थिति अब शरद पवार, एनसीपी और कांग्रेस का मुंह ताकने की हो गई है। भाजपा के एक बड़े नेता का कहना है कि शरद पवार और कांग्रेस पार्टी चाहे तो उद्धव ठाकरे को नई शर्त भी मनवा सकती है। बताते हैं एनसीपी चाहे तो 50-50 का दबाव बढ़ा सकती है, क्योंकि शिवसेना 24 अक्टूबर के बाद जिस तरह से अपने पत्ते खोलती गई, उससे सबसे अधिक नुकसान में वही है।

उसकी हालत तो माया मिली न राम वाली है। बताते हैं इसी खीझ और आत्म सम्मान के कारण उद्धव ठाकरे, संजय राउत को लगातार शरद पवार का दरवाजा देखना पड़ रहा है।

कांग्रेस विधायकों पर है खतरा!

कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव का कहना है कि महाराष्ट्र में इस समय भाजपा 'कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना' लगाकर चल रही है। सूत्रों को आशंका है कि सबसे अधिक खतरा कांग्रेस विधायकों पर है। बताते हैं भाजपा के लिए एनसीपी को तोड़ना आसान नहीं है। शरद पवार अपने इलाके में मजबूत पकड़ रखते हैं। यही वजह है कि अजित पवार के भाजपा के साथ जाने के कुछ घंटे के भीतर ही विधायक शरद पवार के पास आने लगे। शिवसेना में वैसे भी शिवसैनिक स्टाइल वाले नेता हैं, उसे भी बड़ा झटका देना मुश्किल है। इसलिए सत्ता पक्ष की निगाहें 'आपरेशन लोटस' के शूटरों के सहारे कांग्रेस की तरफ ज्यादा है। इसलिए कांग्रेस के पास अपने विधायकों को सुरक्षित रखने का खतरा बढ़ गया है।

क्या शरद पवार पर भरोसा किया जाए?

राहुल गांधी के करीबी, कांग्रेस के कभी मुख्य रणनीतिकारों में रहे पार्टी के पूर्व महासचिव के अनुसार इस समय शरद पवार पर पूरा भरोसा किया जा सकता है। सूत्र का कहना है कि संसदीय राजनीति में इस समय पवार जैसा कोई दूसरा नेता नहीं है। वह एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिसके प्लेटफार्म पर हर दल के नेता का संपर्क मिल जाएगा। सूत्र का कहना है कि इस समय शरद पवार की प्रतिष्ठा पर बन आई है और उनके पूरे राजनीतिक जीवन की साख पर सवाल खड़ा हो गया है। इसलिए वह खुले मन से आगे बढ़ रहे हैं।
 

पार्टी के दूसरे पूर्व महासचिव, राज्यसभा सांसद ने भी कहा कि इस समय पवार पर पूरा भरोसा किया जा सकता है। क्योंकि लड़ाई काफी पेचीदा हो गई है और शरद पवार बहुत दूर निकल चुके हैं। यहां से यू-टर्न बहुत मुश्किल है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की टीम के एक अन्य सदस्य का कहना है, थोड़ा इंतजार कीजिए, खुद दिखाई पड़ेगा। पवार सच बोल रहे हैं। उनपर शिवसेना और कांग्रेस को पूरा भरोसा है। एनसीपी के साथ तीनों दल सरकार बनाएंगे और भाजपा की मौजूदा सरकार अपदस्थ होगी।

भाजपा को है भरोसा

भाजपा के महाराष्ट्र के एक केंद्रीय मंत्री का कहना है कि सरकार बनी है, तो बहुमत भी साबित करेंगे, समय आने दीजिए। सूत्र कहना है कि बिना सोचे समझे सरकार बनाने की तो पहल हुई नहीं है, इंतजार कीजिए। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि फिसलन भरी पिच पर खेल हो रहा है। नकवी का कहना है कि अजित पवार ने कुछ समझकर उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, बहुमत साबित करने की स्थिति आने दीजिए।

अभी तो स्पीकर चयन में रीयल गेम होना है

शिवसेना और कांग्रेस के नेताओं की निगाह विधानसभा में विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि प्रोटेम स्पीकर ही विधायकों को शपथ दिलाएगा। उसका चयन अभी होना है। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष चुना जाना है। विधानसभा अध्यक्ष ही फ्लोर टेस्ट कराएगा। विधानसभा अध्यक्ष सदन में काफी शक्तियां रखता है और इसका चयन इतना आसान नहीं है। क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष बहुमत से चुना जाएगा। बहुमत भाजपा के पास नहीं है, यह गठबंधन के पास है। गठबंधन का विधानसभा अध्यक्ष कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष की तरह विधानसभा की कार्यवाही, फ्लोर टेस्ट, विधायकों की सदस्यस्ता समेत सभी प्रक्रिया निष्पक्ष होकर पूरा करेगा। वहां सारी स्थिति अपने आप साफ हो जाएगी।

 

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