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Maharashtra: महाराष्ट्र की जनता ने शरद पवार से छीना रोटी पलटने का अधिकार; अजित और शिंदे ने की जबरदस्त वापसी

शशिधर पाठक
Updated Sat, 23 Nov 2024 04:20 PM IST

सार

महाराष्ट्र की जनता ने शिवसेना की विरासत उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर गए राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सौंप दी है। एकनाथ शिंदे की पार्टी महाराष्ट्र में दूसरे नंबर का दल बनकर उभरी है। वहीं उद्धव ठाकरे और पुराने मराठा सरकार सरकार पवार की पार्टी को काफी बड़ा झटका लगा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी को काफी कम सीटें मिली हैं।
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maharashtra election result - फोटो : अमर उजाला


सनद रहे कि पिछले साल शरद पवार ने ही नसीहत दी थी कि राजनीति में रोटी पलटने का वक्त आ गया है। उन्होंने कहा था कि रोटी न पलटने पर, वह जल जाती है। हालांकि, इस बयान के कुछ समय बाद ही उनके भतीजे अजित पवार ने दूसरी बार उनका साथ छोड़ (राजनीति की रोटी पलट) दिया था। चुनाव में सबसे चौंकाने वाला नतीजा शिवसेना की राजनीतिक विरासत को लेकर है। लोकसभा चुनाव में जनता ने शरद पवार और उद्धव ठाकरे का साथ दिया था, लेकिन विधानसभा चुनाव में नतीजा ठीक उलट आया है। 


महाराष्ट्र की जनता ने शिवसेना की विरासत उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर गए राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सौंप दी है। एकनाथ शिंदे की पार्टी महाराष्ट्र में दूसरे नंबर का दल बनकर उभरी है। वहीं उद्धव ठाकरे और पुराने मराठा सरकार सरकार पवार की पार्टी को काफी बड़ा झटका लगा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी को काफी कम सीटें मिली हैं।


फडणवीस क्यों कह रहे हैं कि चक्रव्यूह भेदना जानता हूं?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के जीत की चमक देवेंद्र फडणवीस के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही है। देवेंद्र फडणवीस भाजपा की इस जीत के हीरो माने जा रहे हैं। देवेंद्र ही वह शख्स हैं, जिन्होंने शिवसेना से एकनाथ शिंदे की टीम को अलग करने में अहम भूमिका निभाई थी। इससे पहले वह अपने भरोसे पर अजीत पवार को भी शरद से पवार से अलग करके लाए थे। बाद में फडणवीस ने फिर सत्ता में संतुलन को साधने के लिए अजित पवार को पुन: एनडीए में लाने में सफलता पाई थी। इस बार के चुनाव में भी फडणवीस ने काफी बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने पार्टी के भीतर की गुटबाजी को कम करने के लिए काम किया और हर संभावित समझौते की नीति पर चले। एक पूर्व विधायक की माने तो केन्द्र के नेताओं और संघ  के बीच में समन्वय बिठाने तथा सहयोगियों के साथ तालमेल में भी देवेन्द्र का अहम रहा है।


एनसीपी, कांग्रेस और उद्धव सेना ने साधी चुप्पी

एनसीपी के नेता अभी चुनाव नतीजे पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। शिवसेना (उद्धव) के नेता संजय राऊत ने जरूर बयान दिया है। वह इस नतीजे को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। संजय राऊत इसे उद्योगपति गौतम अदाणी से जोड़ रहे हैं और कह रहे हैं कि चुनाव का यह नतीजा महाराष्ट्र की जनता का मत नहीं हो सकता। वह कह रहे हैं क्या एकनाथ शिंदे को 60 के करीब सीटें मिल सकती हैं? लेकिन इस बारे न तो अभी आदित्य ठाकरे कुछ कहना चाह रहे हैं और न ही शरद पवार के करीबी अनिल देशमुख। सुप्रिया सूले से भी बातचीत में सफलता नहीं मिल पाई। कांग्रेस के नेता नाना पटोले अभी चुनाव के  अंतिम नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।

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