ठाकरे के जवाब में डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र की एक-एक इंच जमीन के लिए लड़ेंगे। महाराष्ट्र चुप नहीं बैठेगा। किसी भी हालत में हम महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को अकेला नहीं छोड़ेंगे।
महाराष्ट्र व कर्नाटक के बीच सीमा विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष के नेताओं ने आज नागपुर में विधान भवन के बाहर इसे लेकर प्रदर्शन किया। वहीं, सदन में इस बारे में लाए जा रहे प्रस्ताव पर विपक्ष के नेता व पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने कड़ा रुख अपनाया। ठाकरे ने सीएम एकनाथ शिंदे पर आरोप लगाया कि वे सीमा विवाद पर मौन है, जबकि कर्नाटक के सीएम मुखर हैं।
Nagpur: While Karnataka CM is aggressive on border row, CM Shinde is silent. Until the SC decides Belagavi, Karwar, and Nippani should be declared as a union territory. This should be added in the proposal that is to be passed in the Assembly: Uddhav Thackeray pic.twitter.com/AkxfExSKE7
प्रस्ताव लाएंगे, महाराष्ट्र चुप नहीं बैठेगा : फडणवीस
ठाकरे के जवाब में डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र की एक-एक इंच जमीन के लिए लड़ेंगे। महाराष्ट्र चुप नहीं बैठेगा। किसी भी हालत में हम महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को अकेला नहीं छोड़ेंगे। हम एक एक इंच जमीन के लिए लड़ेंगे, भले सुप्रीम कोर्ट हो या केंद्र सरकार। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती लोगों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। हम प्रस्ताव लाएंगे। महाराष्ट्र चुप नहीं बैठेगा।
Nagpur: In any situation, we won't be leaving our people residing in border areas, alone. We'll fight for every inch of land be it in SC or Centre. We'll fight against injustice meted out to those living in border areas & will bring proposal. Maharashtra won't relent: Maha Dy CM pic.twitter.com/q6nKUiGlgP
इससे पहले महाराष्ट्र के विपक्षी दलों के नेताओं ने सीएम एकनाथ शिंदे, राज्य सरकार और कर्नाटक सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्षी नेता हाथों में तख्तियां लिए हुए थे। इसमें महाराष्ट्र सरकार से मांग की गई है कि या तो वह सीमा विवाद सुलझाए या कुर्सी खाली करे। इस दौरान कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चाव्हाण ने कहा है कि उपमुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों पर महाराष्ट्र सरकार के दावों का समर्थन करने वाला प्रस्ताव सदन में सभी राजनीतिक दलों द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया जाएगा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री को माहौल खराब न करने की चेतावनी देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री से बात करना मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर निर्भर है।
Nagpur, Maharashtra | Opposition parties held a protest & raised slogans against Maharashtra CM Eknath Shinde, state govt & Karnataka govt over the Maharashtra-Karnataka border issue. pic.twitter.com/g6JEHnESlx
1957 से लंबित है विवाद
दोनों राज्यों के बीच सीमा का मुद्दा 1957 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद से लंबित है। महाराष्ट्र ने बेलगावी पर दावा किया है, जो तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा था। इसमें मराठी भाषी आबादी का एक बड़ा हिस्सा है। महाराष्ट्र ने 800 से अधिक मराठी भाषी गांवों पर भी दावा किया है, जो वर्तमान में कर्नाटक का हिस्सा हैं। उधर, कर्नाटक राज्य पुनर्गठन अधिनियम और 1967 महाजन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भाषाई आधार पर किए गए सीमांकन को अंतिम मानता है।
जमीन घोटाले में मंत्री अब्दुल सत्तार के इस्तीफे की मांग की
विपक्षी सदस्यों ने एक जमीन घोटाले को लेकर मंत्री अब्दुल सत्तार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चरणोई की आरक्षित भूमि का नियमितीकरण एक निजी व्यक्ति के पक्ष में कर दिया गया। यह मामला उस वक्त का है, जब सत्तार पिछली सरकार में मंत्री थे। विपक्षी दलों के सदस्य सत्तार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह में आ गए। उन्होंने सदन की कार्यवाही बाधित की और मौजूदा शिंदे सरकार में कृषि मंत्री सत्तार का इस्तीफा मांगा।