AIMIM उम्मीदवार की नामांकन खारिज होने पर खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव में AIMIM के एक सदस्य ने अपने नामांकन पत्र को खारिज किए जाने के खिलाफ सिविल कोर्ट में चुनौती दी है। उनका आरोप है कि चुनाव अधिकारियों ने बिना ठोस कारण के उनका नामांकन रद्द कर दिया। AIMIM सदस्य अनवर शेख ने महाराष्ट्र म्युनिसिपल काउंसिल्स और नगर पंचायत चुनाव नियम, 1966 के तहत अपील दायर की है। अपील में कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताएं हुईं और उनके साथ भेदभाव किया गया।
अनवर शेख का कहना है कि नामांकन पत्र में बहुत छोटी-छोटी गलतियों के आधार पर उनका फॉर्म तुरंत खारिज कर दिया गया। जबकि अन्य उम्मीदवारों को वही गलतियां सुधारने का मौका दिया गया और कुछ को तो नया फॉर्म दोबारा जमा करने की भी अनुमति मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका नामांकन रद्द करना मनमाना है, कानून के खिलाफ है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। साथ ही, इसमें दुर्भावना भी शामिल है। शेख ने अपनी याचिका में इसे “न्याय का गंभीर हनन” बताया है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी।
रामदास आठवले बोले- महायुति का मेयर मराठी होगा
केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रमुख रामदास आठवले ने मुंबई में कहा कि महायुति ने तय किया है कि अगला मेयर मराठी समुदाय से होगा। आठवले ने बताया कि दो दिन पहले वर्ली में हुई महायुति की बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने यह साफ कहा कि महायुति का मेयर मराठी होगा।
उन्होंने कहा कि महायुति का मकसद मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को उद्धव ठाकरे के नियंत्रण से बाहर निकालना है। आठवले के मुताबिक, पहले भाजपा और आरपीआई ने उद्धव ठाकरे को समर्थन दिया था, जिसकी वजह से बीएमसी उनके पास रही। लेकिन अब न तो भाजपा उनके साथ है और न ही आरपीआई। रामदास आठवले ने राज ठाकरे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी रैलियां भले ही बड़ी होती हैं, लेकिन उनके नाम पर वोट नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ आए हैं, लेकिन असली खुशी तब होगी जब मुंबई का मेयर महायुति से बनेगा।
बैंक धोखाधड़ी में सेंट्रल बैंक के दो पूर्व अधिकारियों समेत तीन लोगों को जेल
पुणे स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा में हुए ऋण धोखाधड़ी मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक नंदकिशोर खैरनार और सहायक प्रबंधक रवि भूषण प्रसाद को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों दोषियों पर 75,000-75,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
इसी मामले में सह-कर्जदार प्रियंका प्रशांत विस्पुते को भी दोषी पाते हुए दो साल के सश्रम कारावास और 25,000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। सीबीआई के अनुसार, यह मामला 2016 में दर्ज किया गया था। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 18.75 लाख रुपये का हाउसिंग लोन मंजूर कराने की आपराधिक साजिश रची थी। इस धोखाधड़ी के कारण बैंक को 24.54 लाख रुपये का नुकसान हुआ। मामले के दो अन्य मुख्य आरोपियों की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई बंद कर दी गई थी।