Maharashtra NCP Crisis: मुंबई के बाद दिल्ली में भी बैठक क्यों कर रहे शरद पवार, क्या हैं इसके सियासी मायने?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 06 Jul 2023 01:35 PM IST
सार
आखिर पवार ने मुंबई के बाद दिल्ली में भी बैठक क्यों बुलाई? इसके सियासी मायने क्या हैं? क्या ये अजित पवार गुट के खिलाफ शरद पवार की कोई बड़ी रणनीति है? आइए समझते हैं...
शरद पवार
- फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) पर हक को लेकर सियासी जंग जारी है। चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार के बीच चल रही ये जंग अब दिल्ली तक पहुंच गई है। एनसीपी के संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार ने गुरुवार को दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। इसके पहले पार्टी के मुख्यालय से सारे पोस्टर और बैनर बदल दिए गए। जहां-जहां अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल की फोटो थी, वो सब हटा दिए गए हैं।
शरद पवार की इस बैठक को लेकर सियासी गलियारे में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पवार ने मुंबई के बाद दिल्ली में भी बैठक क्यों बुलाई? इसके सियासी मायने क्या हैं? क्या ये अजित पवार गुट के खिलाफ शरद पवार की कोई बड़ी रणनीति है? आइए समझते हैं...
शरद पवार
- फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) पर हक को लेकर सियासी जंग जारी है। चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार के बीच चल रही ये जंग अब दिल्ली तक पहुंच गई है। एनसीपी के संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार ने गुरुवार को दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। इसके पहले पार्टी के मुख्यालय से सारे पोस्टर और बैनर बदल दिए गए। जहां-जहां अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल की फोटो थी, वो सब हटा दिए गए हैं।
शरद पवार की इस बैठक को लेकर सियासी गलियारे में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पवार ने मुंबई के बाद दिल्ली में भी बैठक क्यों बुलाई? इसके सियासी मायने क्या हैं? क्या ये अजित पवार गुट के खिलाफ शरद पवार की कोई बड़ी रणनीति है? आइए समझते हैं...
पहले जानिए बुधवार को शरद पवार और अजित पवार गुट की बैठक में क्या-क्या हुआ?
बुधवार की सुबह 11 बजे अजित पवार ने विधायकों की बैठक बुलाई थी। अजित गुट का दावा है कि उनके पास 42 से भी ज्यादा विधायकों का समर्थन है। इसके अलावा एमएलसी, सांसद और पार्टी के अन्य नेता और कार्यकर्ता भी उनके साथ हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 53 में से 30 विधायक अजित पवार की बैठक में शामिल हुए। पांच एमएलसी भी इस दौरान अजित के साथ खड़े दिखाई दिए। अजित गुट ने चुनाव आयोग में हलफनामा देकर पार्टी के सिंबल पर खुद का अधिकार भी जताया है।
दूसरी ओर, अजित के चाचा और एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने भी बुधवार एक बजे बैठक बुलाई। इसमें करीब 17 विधायक पहुंचे। दो एमएलसी भी पहुंचे। एनसीपी के पांचों लोकसभा सांसद इस बैठक में शामिल हुए। शरद पवार ने चुनाव आयोग में कैविएट दायर कर अजित पवार गुट के दावे को खारिज करने की मांग की है।
शरद पवार ने दिल्ली में क्यों बुलाई दूसरी बैठक?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधायकों और जिला स्तर के नेताओं को परखने के बाद शरद पवार राष्ट्रीय स्तर पर खुद की और अजित की क्षमता देखना चाहते हैं। चुनाव आयोग के सामने राष्ट्रीय नेताओं के समर्थन का ब्योरा भी दोनों ही गुटों को दिखाना होगा।
एक तरफ अजित पवार गुट ने दावा किया है कि 30 जून को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी और इसमें सभी ने एक स्वर में शरद पवार को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाकर अजित को कमान सौंप दी है। मतलब अजित ही एनसीपी के अध्यक्ष हैं। अब अजित के इस दावे को शरद गुट परखना चाहता है। इसी के अनुसार शरद पवार आगे की रणनीति भी तैयार कर सकते हैं।
कैसे तय होगा कि एनसीपी का असली बॉस कौन?
चुनाव आयोग ऐसे मामलों में कई बिंदुओं की जांच करता है। इसमें विधायिका और संगठन दोनों शामिल होते हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग बंटवारे से पहले पार्टी की टॉप कमेटियों और डिसीजन मेकिंग बॉडी की लिस्ट निकालता है। इससे ये जानने की कोशिश करता है कि इसमें से कितने पदाधिकारी किस गुट में हैं। इसके अलावा किस गुट में कितने सांसद और विधायक हैं।
ज्यादातर मामलों में आयोग की तरफ से पार्टी के पदाधिकारियों और चुने हुए प्रतिनिधियों के समर्थन के आधार पर सिंबल दिया जाता है। अगर किसी वजह से यह संगठन के अंदर समर्थन को सही तरीके से जस्टिफाई नहीं कर पाता, तो आयोग पूरी तरह से पार्टी के सांसदों और विधायकों के बहुमत के आधार पर फैसला करता है।
किसकी दावेदारी कितनी मजबूत?
दल-बदल कानून से बचने के लिए अजित को NCP के 53 में से 36 विधायकों को साथ लाना होगा। बुधवार की बैठक में अजित के साथ 30 विधायक पहुंचे। अजित का दावा है कि उनके समर्थक कुछ विधायक अस्पताल में हैं तो कुछ बाहर हैं। लेकिन सभी ने उन्हें समर्थन दिया है। अगर दावे के अनुरूप अजित के पास 36 से ज्यादा विधायकों का समर्थन होता है तो सभी दल-बदल कानून से बच जाएंगे। 36 से कम रहे तो निलंबन तय है।
दल-बदल कानून की दो शर्तें हैं। जिस दल को नेता छोड़ रहा है, उसका दूसरे दल में विलय हो जाए। दो तिहाई विधायक सहमत हों। दोनों स्थितियां अजित के पक्ष में हैं। अजित पवार का दावा है कि उन्हें राज्य विधानसभा में NCP के कुल 53 विधायकों में से 40 से अधिक का समर्थन प्राप्त है। दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों से बचने के लिए अजित के पास 36 से अधिक विधायक होने चाहिए।
महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर का भी बयान आया है। उन्होंने कहा, 'अभी किसी भी पक्ष ने दावा नहीं किया है कि पार्टी का विभाजन हुआ है। उम्मीद है कि आगामी मानसून सत्र में इस बारे में स्थिति साफ हो जाएगी कि विधानसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक कौन होगा।'