महाराष्ट्र में किसान कर्जमाफी के लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (आईबीजेए) ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भाजपा युवा मोर्चा मुंबई के अध्यक्ष और इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (आईबीजेए) के पूर्व अध्यक्ष मोहित कंबोज की पहल पर आईबीजेए के सदस्य मुख्यमंत्री किसान राहत कोष में100 करोड़ रुपये का आर्थिक सहयोग देंगे।
मोहित कंबोज ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा के दिन उन्होंने आईबीजेए के पदाधिकारियों से बातचीत कर छत्रपति शिवाजी महाराज कृषि समान योजना नाम के इस अभियान में आर्थिक योगदान की अपील की थी।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन लिमिटेड ने सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे किसानों के 34 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने के ऐतिहासिक और साहसिक फैसले के लिए सरकार का समर्थन करें और मुख्यमंत्री कोष में यथासंभव आर्थिक सहयोग दें। ताकि राज्य के खजाने के बोझ को कम किया जा सके। कंबोज की इस पहल का आईबीजेए से जुड़े सभी ज्वेलर्स ने स्वागत करते हुए आर्थिक योगदान देने का फैसला किया है।
कहा किसान देश की अर्थ-व्यवस्था में रीढ़ की हड्डी है
संगठन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि किसान देश की अर्थ-व्यवस्था में रीढ़ की हड्डी है, क्योंकि जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा कृषि से आता है। लेकिन, किसान आर्थिक तंगी और कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके लिए संगठन अपने वार्षिक आय का कुछ हिस्सा महाराष्ट्र सरकार कोष में देंगे। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों का डेढ़ लाख तक का कर्ज माफ करने का फैसला किया है और इस संबंध में बुधवार को शासनादेश भी जारी कर दिया है। करोड़ रुपये का आर्थिक सहयोग देंगे।
मोहित कंबोज ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा के दिन उन्होंने आईबीजेए के पदाधिकारियों से बातचीत कर छत्रपति शिवाजी महाराज कृषि समान योजना नाम के इस अभियान में आर्थिक योगदान की अपील की थी।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन लिमिटेड ने सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे किसानों के 34 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने के ऐतिहासिक और साहसिक फैसले के लिए सरकार का समर्थन करें और मुख्यमंत्री कोष में यथासंभव आर्थिक सहयोग दें। ताकि राज्य के खजाने के बोझ को कम किया जा सके। कंबोज की इस पहल का आईबीजेए से जुड़े सभी ज्वेलर्स ने स्वागत करते हुए आर्थिक योगदान देने का फैसला किया है।
संगठन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि किसान देश की अर्थ-व्यवस्था में रीढ़ की हड्डी है, क्योंकि जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा कृषि से आता है। लेकिन, किसान आर्थिक तंगी और कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके लिए संगठन अपने वार्षिक आय का कुछ हिस्सा महाराष्ट्र सरकार कोष में देंगे। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों का डेढ़ लाख तक का कर्ज माफ करने का फैसला किया है और इस संबंध में बुधवार को शासनादेश भी जारी कर दिया है।