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महाराष्ट्र: मुंबई में मोबाइल रिपेयर करने वाले को मिला 32 करोड़ रुपये के टैक्स बकाए का नोटिस, जानें पूरा मामला

Thu, 01 Oct 2026 03:41 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई

सार

मुंबई के कॉटन ग्रीन में मोबाइल रिपेयरिंग करने वाले 48 वर्षीय महेंद्र म्हापणकर के नाम पर फर्जी कंपनी और बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपये का कथित एक्सपोर्ट कारोबार किया गया। इसके चलते उन्हें 31.80 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी का नोटिस मिला। महेंद्र ने एक परिचित पर दस्तावेजों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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मोबाइल रिपेयर करने वाले को मिला टैक्स बकाए का नोटिस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मुंबई के कॉटन ग्रीन इलाके में रहने वाले 48 साल के एक मोबाइल रिपेयरिंग करने वाले शख्स के होश उस समय उड़ गए, जब उन्हें इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग की तरफ से करीब 32 करोड़ रुपये के टैक्स बकाये का नोटिस मिला। जिस कारोबार और लेन-देन के आधार पर यह नोटिस भेजा गया था, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी ही नहीं थी। मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग ने अब इस मामले में केस दर्ज किया है। आरोप है कि पीड़ित के एक जानकार ने उनके कागजात का गलत इस्तेमाल कर उनके नाम पर फर्जी कंपनी और बैंक खाते खोले और फिर उनके नाम से करोड़ों रुपये का एक्सपोर्ट कारोबार किया।
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शिकायतकर्ता 48 वर्षीय महेंद्र म्हापणकर कॉटन ग्रीन के फेरबंदर इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करते हैं। पुलिस के मुताबिक, कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान उनका काम पूरी तरह बंद हो गया था। इसी दौरान उनकी मुलाकात संजय तांबे नाम के एक शख्स से हुई, जो उस समय क्लीन-अप मार्शल के तौर पर काम कर रहा था। तांबे ने महेंद्र से कहा कि उसके कुछ दोस्तों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी कागजात की जरूरत है। उसकी बातों में आकर महेंद्र ने अपने कागजात उसे सौंप दिए।

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पुलिस के अनुसार, कागजात मिलने के बाद तांबे ने महेंद्र के नाम पर 'गैलेक्सी ट्रेडर्स' नाम की कंपनी बना ली। आरोप है कि उसने महेंद्र को भरोसा दिलाया कि इस कारोबार से होने वाले मुनाफे का हिस्सा उनके बैंक खाते में जमा किया जाएगा। इसी भरोसे में महेंद्र ने दो अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाने में भी उसकी मदद की। इसके बाद जब भी महेंद्र कारोबार और मुनाफे के बारे में पूछते, तो तांबे उन्हें यही बताता कि कारोबार में अभी कोई फायदा नहीं हुआ है।

कागजात के गलत इस्तेमाल का खुलासा कुछ दिनों पहले हुआ। महेंद्र के पास इनकम टैक्स विभाग की तरफ से 31.80 करोड़ रुपये के टैक्स बकाये का ईमेल आया। तब उन्होंने एक टैक्स कंसल्टेंट से संपर्क किया। टैक्स कंसलटेंट ने इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। महेंद्र और टैक्स कंसल्टेंट को शुरुआत में लगा कि शायद विभाग की ओर से कोई गलती हुई है, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि नोटिस में कोई गलती नहीं है और उनके नाम पर दर्ज टैक्स देनदारी सही है।
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इसके बाद महेंद्र खुद इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग के दफ्तर पहुंचे और अपने नाम पर हुए लेन-देन और कारोबार से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने ईओडब्ल्यू में शिकायत की। पुलिस को दिए बयान में महेंद्र ने बताया कि उन्होंने तांबे को जो कागजात दिए थे, उनका  गलत इस्तेमाल किया गया है। आरोप है कि तांबे ने सुभान कुरैशी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर महेंद्र के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और उनके नाम से बड़े पैमाने पर फर्जी एक्सपोर्ट कारोबार किया। पुलिस के मुताबिक, इसी फर्जी कारोबार और लेन-देन के कारण महेंद्र के नाम पर करोड़ों रुपये की टैक्स देनदारी हो गई और विभाग की ओर से उन्हें लगातार नोटिस भेजे जाने लगे। महेंद्र की शिकायत पर ईओडब्ल्यू ने कालाचौकी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है।
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