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महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के लिए महाविकास अघाड़ी तैयार: सभी 17 सीटों पर लड़ेगी चुनाव, जल्द होगा अंतिम फैसला

Wed, 27 May 2026 07:26 PM IST
अमन तिवारी आईएएनएस, मुंबई

सार

महाविकास अघाड़ी महाराष्ट्र विधान परिषद की सभी 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस बीच कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया।
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महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल - फोटो : PTI
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विस्तार
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महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव के लिए महाविकास अघाड़ी (MVA) ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। गठबंधन ने फैसला किया है कि वह सभी 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा। इनमें स्थानीय निकायों की 16 सीटें और नागपुर की एक उपचुनाव वाली सीट शामिल है। इन सभी सीटों पर 18 जून को मतदान होना है।
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सीटों के बंटवारे को लेकर बुधवार को एमवीए के बड़े नेताओं के बीच शुरुआती चर्चा पूरी हो गई। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बताया कि अगले दो दिनों में एक और बैठक होगी। इसके बाद सीटों के बंटवारे का अंतिम फॉर्मूला सबके सामने रखा जाएगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में सुप्रिया सुले, शशिकांत शिंदे, अनिल परब, अंबादास दानवे और मिलिंद नार्वेकर जैसे प्रमुख नेता शामिल हुए।

बैठक के बाद हर्षवर्धन सपकाल ने सत्ताधारी गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखती और चुनाव जीतने के लिए पार्षदों की खरीद-फरोख्त कर रही है। सपकाल ने दावा किया कि पार्षदों को पांच लाख रुपये एडवांस देकर अपनी तरफ करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि एमवीए लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए पूरी एकजुटता के साथ यह चुनाव लड़ेगा।
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सपकाल ने यह भी दावा किया कि एमवीए के भीतर सीटों को लेकर कोई मतभेद नहीं है। इसके उलट उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी 'ट्रिपल इंजन' सरकार के भीतर आपसी खींचतान और असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। सपकाल ने बताया कि नासिक के चांदवड़ में प्याज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर एमवीए ने बड़ा आंदोलन किया था। किसानों की मांग है कि प्याज का भाव 3000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए।

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सपकाल के अनुसार, किसानों की एकजुटता देखकर सरकार घबरा गई है। इसी दबाव की वजह से दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ प्याज संकट पर आपातकालीन बैठक हो रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि वे दिल्ली से खाली हाथ न लौटें और किसानों के लिए ठोस आर्थिक मदद लेकर आएं।
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