महाराष्ट्र सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने शुक्रवार को उस दावे का खंडन कर दिया। जिसमें दावा किया गया था कि, वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच से बचने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा नीत गठबंधन में शामिल हुए थे। एनसीपी नेता ने कहा कि, उन्होंने कभी भी इस तरह की बात नहीं की है। भुजबल पत्रकार राजदीप सरदेसाई की एक पुस्तक में किये गए दावे का जवाब दे रहे थे।
मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि उनके खिलाफ मामला तब बंद कर दिया गया था जब वह पिछली सरकार का हिस्सा थे। भुजबल ने कहा कि वह और उनके सहयोगी अपने निर्वाचन क्षेत्रों में त्वरित विकास सुनिश्चित करने के लिए भाजपा के पाले में गए।
राजदीप सरदेसाई की पुस्तक में दावा किया गया है कि राकांपा नेता ने स्वीकार किया कि ईडी मामला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संस्थापक शरद पवार से अलग होने और जुलाई 2023 में पार्टी को विभाजित करने वाले अजित पवार का समर्थन करने संबंधी उनके फैसले का एक कारण था।
यह ध्यान भटकाने की कोशिश-भुजबल
उन्होंने कहा कि, मैंने पुस्तक नहीं पढ़ी है। मुझे लगता है कि यह ध्यान भटकाने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। हम विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के बीच में हैं। चुनाव के बाद मैं अपने वकीलों से परामर्श करूंगा और अगर कुछ भी गलत हुआ तो कार्रवाई करूंगा। जब मैं उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में था, तब मेरा मामला बंद कर दिया गया था। मीडिया में मेरे बारे में जो भी बताया जा रहा है, मैं उससे इनकार करता हूं।
सुले ने दावों का किया था समर्थन
इससे पहले दिन में शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने एक समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित पुस्तक के अंशों का हवाला दिया और कहा कि वे उनके आरोपों का समर्थन करती हैं। बता दें कि, जुलाई, 2023 में अजित पवार और उनके समर्थक विधायकों ने राकांपा से अलग होकर भाजपा और एकनाथ शिंदे के महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे। राकांपा (एसपी) के प्रवक्ता महेश तापसे ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को जांच से बचने के लिए सत्तारूढ़ दल में शामिल होने की बात कबूल करते देखना भयावह है।