महाराष्ट्र में कोपर्डी निर्भयाकांड के विरोध में भड़की मराठा आंदोलन की चिंगारी अब मुंबई के करीब पहुंच गई है। मराठा समाज ने रविवार को मुंबई से सटे ठाणे में अपना दम दिखाते हुए शांतिपूर्वक और अनुशासनात्मक तरीके से मूक मोर्चा निकाला। हालांकि अन्य जगहों की तूलना में यहां आंदोलनकारियों की संख्या कम थी लेकिन यहां मांगे न माने जाने की चिढ़ की बानगी दिखाई दी।
मराठा आरक्षण समेत तमाम मांगों के लिए 9 अगस्त से शुरू हुए मराठा मूक मोर्चे के अब तक कई पड़ाव हो चुके हैं। रविवार को अक्टूबर महीने की दहकती गर्मी और भारी उमस के बीच ठाणे में भी भगवा आसमान दिखाई दिया। मराठा समाज के बूढ़े, बच्चे, युवक और महिलाएं हाथों में भगवा झंडा लिए सिर पर ‘एक मराठा लाख मराठा’ लिखी हुई गांधी टोपी पहने शांतिपूर्वक आंदोलन किया। मराठा समाज के नौनिहाल, छत्रपति शिवाजी महाराज के पोशाक में लोगों के आकर्षण के केंद्र थे। वह अपने हाथ में तलवार लेकर सिर पर साफा बांधे हुए पोषाक में नजर आ रहे थे।
सुबह 7 बजे से ही ठाणे के तीन हाथ नाका पर मराठा इकट्ठा होने लगे। ठाणे जिले के अंबरनाथ, बदलापुर, कल्याण, कासारा, मुरबाड़ के साथ-साथ पालघर, नालासोपारा, वसई, विरार, मीरा-भाईंदर और नवी मुंबई आदि इलाकों से लोग बसों और ट्रेनों में भरकर स्टार्टिंग प्वाइंट पर पहुंचे थे। महिलाओं ने अलग और पुरुषों ने अलग से कतार लगाई थी। छोटे बच्चों के साथ 60 से 80 वर्ष के वृद्ध चले। वहीं, लड़कियां मोर्चे का नेतृत्व करती दिखाई दीं। मराठा मूक मोर्चा ठाणे के तीन हाथ नाका से तीन किलोमीटर दूर जिलाधिकारी कार्यालय तक निकाला गया। इस दौरान मराठा समाज की आठ बच्चियों ने जिलाधिकारी डॉ महेंद्र कल्याणकर को ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी कार्यालय के सामने ही राष्ट्रगीत गाकर मोर्चे का समापन किया गया। इस मोर्चे में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने भी हिस्सा लिया।