मालेगांव ब्लास्ट मामले में सभी आरोपी बरी होने पर भड़के ओवैसी
वहीं एनआईए कोर्ट द्वारा सभी सात आरोपियों को बरी किए जाने पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया कि क्या वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे या नहीं?
ओवैसी ने कहा कि 17 साल बाद सभी आरोपी बरी हो गए। महाराष्ट्र सरकार ने 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट केस में कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। तो क्या अब अगर ऐसा नहीं किया गया, तो ये आतंकवाद पर दोहरा मापदंड नहीं होगा? उन्होंने आगे कहा कि मालेगांव विस्फोट में मिलिट्री ग्रेड आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। इतना खतरनाक विस्फोटक कहां से आया? इसकी जांच क्यों नहीं हुई? असली गुनहगार आज भी खुले घूम रहे हैं। पीड़ितों को न्याय कौन देगा?
ओवैसी ने मोदी सरकार और महाराष्ट्र सरकार से साफ तौर पर पूछा कि क्या वे इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में जाएंगी या नहीं? अगर नहीं गए, तो यह साफ दिखेगा कि आतंकवाद के मामलों में सिर्फ राजनीतिक फायदा देखा जा रहा है, न्याय नहीं।
जो दोषी हैं उन्हें सजा मिलनी चाहिए- अखिलेश यादव
कोर्ट के फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मैंने पूरी रिपोर्ट नहीं पढ़ी है, लेकिन जो लोग इतनी बड़ी घटना में शामिल थे, उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
फैसले को चुनौती देगी कांग्रेस
वहीं इस फैसले पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि इससे फर्क पड़ा है, वे इसे चुनौती देंगे। भाजपा कुछ भी कहे, लेकिन ये कोर्ट का फैसला है और इसे चुनौती दी जा सकती है। निश्चित रूप से दोबारा अपील की जाएगी।
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सबूत नहीं थे, इसलिए कोर्ट ने बरी किया- रामदास अठावले
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि इस केस की सुनवाई कई वर्षों तक चली। अदालत ने सभी आरोपियों को बरी किया क्योंकि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है, उसका कोई धर्म नहीं होता। जब कोर्ट में सुनवाई होती है तो सबूत देना जरूरी होता है।
शिंदे गुट की शिवसेना बोली- कांग्रेस की खुल गई पोल
वहीं इस फैसले का शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने स्वागत करते हुए कहा कि हमें इस फैसले से बहुत खुशी है। कांग्रेस ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इन लोगों को फंसाया और ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द गढ़ा। अब उनकी पोल खुल चुकी है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पहले ही संसद में कह चुके थे कि "हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकता", और अब यह बात साबित हो गई है।
आरएसएस नेता सुनील आंबेकर बोले- सच सामने आ गया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने अपने निजी और राजनीतिक कारणों से इस मामले को उठाया और पूरी हिंदू समाज व धर्म को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन अब सच सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने सबूतों के आधार पर सही फैसला सुनाया है और यह साबित हो गया कि सभी आरोप बेबुनियाद थे।
भाजपा सांसद बृजलाल बोले- हिंदू समाज को न्याय मिला
भाजपा सांसद बृजलाल ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मैं कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा और सभी निर्दोषों को बधाई देता हूं। कोर्ट ने ना सिर्फ उन्हें, बल्कि पूरे हिंदू समाज को न्याय दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि एक फर्जी भगवा आतंकवाद' की थ्योरी गढ़ी गई थी। कांग्रेस और उसके नेता मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, प्रियंका और राहुल गांधी को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने देश के साथ विश्वासघात किया है।
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भाजपा नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने किया फैसला का स्वागत
महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री और भाजपा नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने भी फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को आतंकी बताया गया, जिससे करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुईं। ये फैसला आध्यात्मिक मूल्यों पर हुए हमले का जवाब है।
क्या है मालेगांव विस्फोट मामला?
गौरतलब है कि आज से 17 साल पहले 29 सितंबर 2008 को मालेगांव शहर में एक मोटरसाइकिल में बम लगाया गया, जो एक मस्जिद के पास फट गया। इस धमाके में छह लोगों की मौत और 101 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित सहित सात लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब लगभग 17 साल बाद, कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया है।