महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को बड़ा फैसला लेते हुए कुष्ठ को सूचित करने योग्य बीमारी घोषित किया है। अब राज्य में अगर किसी मरीज में कुष्ठ का मामला पाया जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट करना होगा। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि हर नया लेप्रोसी केस दो हफ्तों के भीतर जिला स्वास्थ्य कार्यालय, स्वास्थ्य सेवाओं के सहायक निदेशक और स्थानीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
देरी से इलाज पर हो सकता है स्थायी नुकसान
राज्य सरकार ने बताया कि लेप्रोसी माइकोबैक्टेरियम लेप्राई नामक जीवाणु से होता है और यह एक संक्रामक बीमारी है। अगर इसका इलाज देर से किया जाए, तो यह अंगों में विकलांगता तक पैदा कर सकता है। इसलिए जल्द निदान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
सरकार का लक्ष्य- 2027 तक महाराष्ट्र से कुष्ठ का उन्मूलन
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि महाराष्ट्र को 2027 तक कुष्ठ मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सभी डॉक्टरों, पैथोलॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, स्वास्थ्य कर्मियों और क्षेत्रीय अधिकारियों को हर मरीज के उपचार और फॉलो-अप की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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हर संपर्क व्यक्ति को दें जरूरी सुरक्षा
विभाग ने कहा कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी ऐसे व्यक्तियों को भी पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस दें, जो मरीज के करीबी संपर्क में आए हों। इससे संक्रमण के फैलने की संभावना कम होगी। सेंट्रल लेप्रोसी डिवीजन के डॉ. सुनील गिट्टे ने कहा कि 15 राज्यों में कुष्ठ रोग चुनौती बना हुआ है। इसमें छत्तीसगढ़ में प्रति 10 हजार 2.3 फीसदी, ओडिसा में 2.31, महाराष्ट्र में 1.12 फीसदी मरीज मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में यह संख्या 0.37 फीसदी है। बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, पश्चिम बंगाल और दिल्ली भी प्राथमिकता पर है।
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राज्य में मौजूदा स्थिति: 7,800 से ज्यादा नए मरीज
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक महाराष्ट्र में 7,863 नए लेप्रोसी मरीज दर्ज किए गए हैं, जबकि 13,010 मरीज फिलहाल इलाज के अधीन हैं।