महाराष्ट्र विधानमंडल ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिये 27 फीसदी आरक्षण बहाली होने तक राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव स्थगित करने का फैसला किया है। इस संबंध में सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में एक प्रस्ताव पास किया गया।
राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग का राजनीतिक आरक्षण बहाल होने तक स्थानीय निकाय चुनाव टालने का प्रस्ताव उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने विधानसभा में पेश किया। विपक्ष नेता देवेंद्र फडणवीस ने भी इसका समर्थन किया। अजीत पवार ने कहा, 27 फीसदी आरक्षण के बिना ओबीसी के लोग राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रह जाएंगे। इसलिए विधानसभा की ओर से एकमत से चुनाव आयोग से अपील की जाती है कि ओबीसी आरक्षण के बिना स्थानीय निकाय चुनाव नहीं कराया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है आरक्षण पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के जिन स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण है उन सीटों पर चुनाव पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि अन्य सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया जारी रहेगी। इससे पहले मध्यप्रदेश विधानसभा में भी ओबीसी आरक्षण के बिना स्थानीय निकाय चुनाव न कराने का प्रस्ताव पास किया गया है।
आदित्य ठाकरे को चिढ़ाने पर महाराष्ट्र विधानसभा में हंगामा
केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के पुत्र विधायक नितेश राणे को मंत्री आदित्य ठाकरे को चिढ़ाना महंगा पड़ गया। सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना के विधायकों ने भाजपा विधायक नितेश राणे को राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के साथ अनुचित आचरण के लिए निलंबित करने की मांग की। इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ जिससे सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी गई।
विधानसभा में प्रश्नकाल के बाद शिवसेना विधायक सुहास कांदे ने यह मुद्दा उठाया। कांदे ने कहा कि पिछले सप्ताह राणे जब विधान भवन परिसर में बैठे थे, तब उन्होंने भवन के भीतर जा रहे आदित्य ठाकरे को ओर देखकर ‘म्याऊं-म्याऊं’ की आवाज निकाली। सभी सदस्य इस पर एकमत हैं कि नेताओं के विरुद्ध अभद्र आचरण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन राणे ने अपने बर्ताव को सही ठहराया और संवाददाताओं से कहा कि वह ऐसा करते रहेंगे।
कांदे ने कहा कि आदित्य ठाकरे एक सम्मानित व्यक्ति हैं और उन्होंने नितेश राणे पर ध्यान नहीं दिया। हम अपने नेता का इस प्रकार से अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने मांग की कि या तो राणे सदन में माफी मांगें या उन्हें निलंबित किया जाए। शिवसेना विधायक सुनील प्रभु और भास्कर जाधव ने कांदे का समर्थन किया। जाधव ने तो यहां तक कहा कि राणे को विधानसभा की सदस्यता से स्थायी तौर पर निलंबित कर देना चाहिए।
सदन के बाहर हुई घटना के लिए निलंबित करना गलत: फडणवीस
नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नितेश को उनके बर्ताव के लिए फटकार लगाई जाएगी। लेकिन सदन के बाहर हुई घटना के लिए एक सदस्य को निलंबित करना उचित नहीं है। फडणवीस ने इससे पहले कहा कि जब एनसीपी नेता छगन भुजबल सदन में प्रवेश करते थे तब भास्कर जाधव भी आवाज निकालते थे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा, हमें आश्चर्य है कि जो घटना सदन के बाहर हुई, उस पर विधानसभा में चर्चा क्यों हो रही है। पीठासीन अधिकारी ने कहा कि ऐसी घटनाएं पुनऱ् न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक की जाएगी।