पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ में हुए 2.2 करोड़ रुपये के हाई-टेक 'बॉस स्कैम' मामले में पुलिस के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। साइबर पुलिस ने बैंक खातों की जांच, पैसों के लेन-देन के सुरागों और मोबाइल नंबरों के तकनीकी विश्लेषण की मदद से इस पूरे फ्रॉड के मुख्य मास्टरमाइंड को मुंबई से सटे डोंबिवली से गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही पुलिस ने उसके दो और साथियों को भी गिरफ्त में लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 20 साल के संचय पराग चव्हाण, 24 साल के रमेश कुमार शंकरलालजी पूनिया और 20 साल के प्रकाश गोवर्धनराम पंवार के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया है कि इस पूरी ठगी का मुख्य अड्डा मुंबई और उसके आसपास का इलाका ही था। डोंबिवली ईस्ट का रहने वाला संचय पराग चव्हाण इस नेटवर्क का सबसे अहम मोहरा था। पुलिस को इस पूरे गिरोह का पहला सुराग संचय के ही बैंक खाते से मिला था। जब पुलिस ने संचय से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपने बाकी साथियों का राज खोल दिया। इसके बाद पुलिस पनवेल में गैस रिपेयरिंग का काम कर रहे पूनिया और पंवार तक आसानी से पहुंच गई। मूल रूप से राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले पूनिया और पंवार आजीविका की तलाश में महाराष्ट्र आए थे। यहां काम के सिलसिले में ही उनकी मुलाकात संचय से हुई और फिर तीनों ने मिलकर साइबर अपराध का यह बड़ा खेल रच डाला।
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यह पूरा मामला एक ऑटोमोबाइल डीलर कंपनी से जुड़ा है, जिसे ठगो ने 'बॉस स्कैम' का शिकार बनाया था। ठगों ने सबसे पहले कंपनी के अकाउंट्स एग्जीक्यूटिव का फोन हैक किया। इसके बाद वे एग्जीक्यूटिव को कंपनी के असली मालिक के नाम और फोटो वाले फर्जी व्हाट्सऐप अकाउंट से मैसेज भेजने लगे। एग्जीक्यूटिव को ऐसा लगा जैसे सारे निर्देश सीधे उसके बॉस की तरफ से ही आ रहे हैं। इस झांसे में आकर उसने कुछ ही घंटों के भीतर तीन बार में कुल 2.2 करोड़ रुपये आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
इस बड़ी धोखाधड़ी की पोल तब खुली जब अकाउंट्स एग्जीक्यूटिव ने किसी काम के सिलसिले में कंपनी के मालिक से सीधे बात की। ठगी का अहसास होते ही तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने जब पैसों की पड़ताल शुरू की, तो पाया कि ठगी गई रकम को कुल पांच अलग-अलग बैंक खातों में भेजा गया था।
इनमें से मुंबई के एक बैंक खाते की जांच करते हुए पुलिस डोंबिवली ईस्ट में रह रहे संचय चव्हाण तक पहुंच गई। संचय की गिरफ्तारी के बाद मामले की परतें खुलती चली गईं और पुलिस ने पनवेल में छिपे उसके दोनों साथियों को भी गिरफ्त में ले लिया। पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपियों ने खातों में पैसे आते ही एटीएम और चेक के जरिए एक बड़ा हिस्सा तुरंत निकाल लिया था।