सार
महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ती लागत और बदली आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कई इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं की समीक्षा की और उन्हें रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग के लिए केवल व्यवहारिक और जरूरी परियोजनाओं को ही आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि दूसरी ओर विपक्ष इसे सत्ता के भीतर मतभेद से जोड़कर देख रहा है।
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण करीब 40,000 करोड़ रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं रद्द कर दी गई हैं। एक मराठी अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि हालात बदलने और खर्च बढ़ने से ये प्रोजेक्ट अब आर्थिक रूप से सही नहीं रह गए थे। इसलिए पूरी सोच-समझकर इन्हें रोकने का फैसला लिया गया।
क्या बोले सीएम फडणवीस?
फडणवीस ने बताया कि सरकार ने शहरी विकास विभाग के पुराने प्रस्तावों की समीक्षा की। इसमें पाया गया कि नए नियमों और आर्थिक बोझ को देखते हुए कई प्रोजेक्ट्स पर फिर से विचार करना जरूरी है। उन्होंने यूनिफाइड डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशंस (यूडीसीपीआर) का जिक्र करते हुए कहा कि विसंगतियों को दूर करने के लिए बदलाव जरूरी थे। उन्होंने साफ किया कि जनता का पैसा सही जगह लगे, यह उनकी जिम्मेदारी है और प्रोजेक्ट्स को मनमाने ढंग से नहीं रोका गया है।
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इन बयानों के बीच राजनीति तेज
मामले में अब इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री जानबूझकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शहरी विकास विभाग को निशाना बना रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह कोई छोटा मतभेद नहीं, बल्कि महायुति सरकार में पड़ी एक बड़ी दरार है।
क्या बोली कांग्रेस?
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि चुनाव प्रचार खत्म होते ही मुख्यमंत्री उप मुख्यमंत्रियों पर कुप्रबंधन के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे आरोप लगाना सरकार के भीतर की लड़ाई को दिखाता है। सावंत ने सवाल उठाया कि बिना जांच के इतना बड़ा फैसला कैसे लिया गया? उन्होंने पूछा कि सिर्फ शहरी विकास विभाग को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है?
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भाजपा नेता ने की थी आलोचना
गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी भाजपा मंत्री गणेश नाइक ने भी हाल ही में शहरी विकास के कुछ नियमों की आलोचना की थी, जिसे एकनाथ शिंदे के विभाग से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस ने मुंबई और अन्य नगर निगमों के चुनाव से ठीक पहले इस खुलासे के समय पर भी सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि सरकार में साथ होने के बावजूद भाजपा और शिंदे गुट कुछ जगहों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
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