महाराष्ट्र की को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के लिए राज्य सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अब किसी भी रिहायशी या व्यावसायिक इमारत में शराब की नई दुकान खोलने के लिए संबंधित हाउसिंग सोसायटी से इजाजत लेना अनिवार्य होगा। यही नियम पुरानी दुकान को किसी इमारत में स्थानांतरित करने पर भी लागू होगा। गृह विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार के इस फैसले से मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे बड़े शहरों के लाखों रहवासियों को सीधी राहत मिलेगी। लंबे समय से सोसायटियों और शराब कारोबारियों के बीच इसको लेकर विवाद चल रहा था। अब हाउसिंग सोसायटियों के पास अपने परिसर में दुकानें रोकने की सीधी कानूनी ताकत आ गई है।
नियमावली में संशोधन, खत्म हुआ पुराना लूपहोल
अब तक शराब लाइसेंसधारक नियमों की कमियों का फायदा आसानी से उठा लेते थे। वे इमारत के पूरी तरह तैयार होने या सोसायटी के गठन से पहले ही संबंधित विभागों से अनुमति हासिल कर लेते थे। बाद में जब लोग वहां रहने आते थे, तो उनके पास विरोध करने का कोई प्रभावी कानूनी रास्ता नहीं बचता था।
सरकार ने इस खामी को दूर करने के लिए पुराने कानूनों में बड़ा बदलाव किया है। 'बॉम्बे फॉरेन लिकर रूल्स, 1953' और 'महाराष्ट्र कंट्री लिकर रूल्स, 1973' में संशोधन किए गए हैं। वर्ष 2026 के इन नए संशोधनों के तहत विदेशी और देशी दोनों प्रकार की शराब दुकानों के लिए सोसायटी की एनओसी को अनिवार्य बना दिया गया है।
पार्टशियल ओसी पर भी कस गया शिकंजा
मुंबई में अक्सर बिल्डर इमारत के केवल व्यावसायिक हिस्से का निर्माण पूरा करके कब्जा दे देते हैं। इस स्थिति को 'पार्टशियल ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' (पार्टशियल ओसी) कहा जाता है। शराब कारोबारी इसी स्थिति का लाभ उठाकर रिहायशी हिस्सों के बसने से पहले ही दुकान शुरू कर देते थे। नए संशोधनों ने इस रास्ते को भी पूरी तरह से बंद कर दिया है। अब अगर किसी इमारत को केवल आंशिक कब्जा प्रमाणपत्र मिला है, तब भी वहां शराब की दुकान खोलने या शिफ्ट करने के लिए पंजीकृत हाउसिंग सोसायटी की मंजूरी लेना जरूरी होगा।
रहवासियों की सुरक्षा और शांति को प्राथमिकता
राज्य भर की हाउसिंग सोसायटियां लंबे समय से इस नियम की मांग कर रही थीं। इमारतों के नीचे शराब की दुकानें खुलने से वहां रहने वाले परिवारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
दुकानों के बाहर लगने वाली भीड़, अवैध पार्किंग और देर रात तक होने वाली गतिविधियों से शांति भंग होती थी। इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा प्रभावित हो रही थी। नए फैसले के बाद अब सोसायटियों को अपने परिसर का माहौल सुरक्षित बनाए रखने का अधिकार मिल गया है।
तत्काल प्रभाव से लागू हुआ नया आदेश
यह महत्वपूर्ण संशोधन राज्यपाल के आदेश पर जारी किया गया है। गृह विभाग के उप सचिव रवींद्र औटे द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। सरकार का यह नया नियम 'महाराष्ट्र नशाबंदी कानून' की धारा 143 के तहत पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।