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Maharashtra Updates: संजय राउत बोले- बंगाल में चुनाव के लिए UN भेजे पर्यवेक्षक, पीएम मोदी को दी बड़ी चुनौती

Sat, 21 Mar 2026 03:34 PM IST
Jyoti Bhaskar न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
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महाराष्ट्र की बड़ी खबरें - फोटो : अमर उजाला
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पश्चिम बंगाल में चुनाव की सरगर्मियों के बीच महाराष्ट्र से भी बयानबाजी का दौर जारी है। तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन करने वाले शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शनिवार को भारतीय लोकतंत्र की अखंडता पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। राउत ने कहा, देश में चुनाव के दौरान हेरफेर, अपहरण और दबाव जैसे मामले सामने आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक स्तर पर देश के लोकतंत्र की तारीफ कर रहे हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र को बंगाल के विधानसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक भेजना चाहिए। राउत ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सत्ता में आने के बाद कोई चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए हैं। चुनाव आयोग अब निष्पक्ष नहीं रहा। बकौल संजय राउत, बंगाल में 'अघोषित राष्ट्रपति शासन' और आपातकाल है। बड़े पैमाने पर अधिकारियों का तबादला किया जा रहा है। अगर पीएम मोदी में हिम्मत है तो गुजरात और असम में भी ऐसे बदलाव कराएं। राउत ने कहा कि अब चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और भाजपा के बीच कोई अंतर नहीं बचा है।
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हत्या के मामले में दो भाइयों को उम्रकैद

महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने शराब पीते समय हुई बहस के बाद एक सहकर्मी मजदूर की हत्या के आरोप में दो भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला नौ साल पुराने एक मामले में आया है, जिसमें दोनों भाइयों को हत्या और सामान्य इरादे के तहत भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया गया है।

क्या है मामला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर.एस. भकारे ने अपने फैसले में अशोक लालजीकुमार चौरसिया (39) और उनके बड़े भाई कमलेशकुमार (53) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह घटना 20 मई, 2017 की रात को मीरा रोड इलाके के एक बगीचे में हुई थी। उस समय आरोपी, मृतक राजेंद्र उर्फ राजन मेश्राम और एक अन्य व्यक्ति, बीरू नेतम, शराब का सेवन कर रहे थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जब बीरू ने अशोक से अधिक शराब मांगी, तो विवाद शुरू हो गया। यह कहासुनी जल्द ही हाथापाई में बदल गई, जिसके दौरान दोनों भाइयों ने राजेंद्र के सिर पर लकड़ी के लट्ठे से बार-बार वार किया। इस हमले में राजेंद्र की मौत हो गई, जबकि बीरू भी घायल हो गया।

अदालत का फैसला 
अदालत ने इस मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक निष्कर्षों पर भरोसा किया। ट्रायल के दौरान सूचना देने वाले और घायल गवाह का पता नहीं चल सका था, जिसके कारण वे गवाही नहीं दे सके। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृत्यु का संभावित कारण सिर की चोट थी, जो कि अप्राकृतिक थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताई गई चोटें लकड़ी के लट्ठे से संभव थीं और ये चोटें मौत का कारण बनने के लिए पर्याप्त थीं।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी अपने कपड़ों पर मिले खून के धब्बों के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सके। साथ ही, आरोपी को भी चोटें आई थीं, लेकिन वे यह नहीं बता पाए कि उन्हें चोटें कैसे लगीं। इन तथ्यों के आधार पर, अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष ने उचित संदेह से परे आरोपियों के अपराध को साबित कर दिया है।

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