महाराष्ट्र के जालना में बंजारा समाज के कार्यकर्ता विजय चव्हाण ने समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग को लेकर अनोखा आंदोलन शुरू किया है। उन्होंने शनिवार से अंबाड चौफुली इलाके में एक पेड़ से बंधी चारपाई पर बैठकर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। चव्हाण ने कहा कि उन्हें कलेक्टर कार्यालय में धरना देने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए वे खुले में ही आंदोलन कर रहे हैं। बंजारा समुदाय वर्तमान में विमुक्त जाति एवं घुमंतू जनजाति (वीजेएनटी) वर्ग में शामिल है और तीन प्रतिशत आरक्षण का लाभ पा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूर्व हैदराबाद राज्य के राजपत्र में बंजारों को जनजाति के रूप में मान्यता दी गई थी। अब वे उसी दर्जे की बहाली की मांग कर रहे हैं। इस बीच ठाणे में समुदाय के नेताओं ने घोषणा की कि नौ नवंबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में विशाल रैली निकाली जाएगी।
सोना तस्करी मामले में एयरपोर्ट के सफाईकर्मी गिरफ्तार
मुंबई हवाई अड्डे पर काम करने वाले दो सफाईकर्मियों को 1.6 करोड़ रुपये के विदेशी सोने की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने की। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि एक अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह इस काम में शामिल है, जो यात्रियों के जरिए सोना विमान में छुपवाता था, जिसे बाद में अंदरूनी संपर्क वाले हवाई अड्डे के कर्मचारियों के जरिए निकाल लिया जाता था। दोनों आरोपी एक निजी एयरपोर्ट सेवा कंपनी के कर्मचारी हैं और शनिवार को पकड़े गए। डीआरआई को पहले से सूचना थी कि छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विदेशी सोने की तस्करी हो रही है। इसके बाद वहां चुपचाप निगरानी शुरू की गई।
जालना: बंजारा कार्यकर्ता का चारपाई पर अनशन शुरू
महाराष्ट्र के जालना शहर में एक बंजारा कार्यकर्ता ने अपने समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन शुरू किया है। विजय चव्हाण नाम के इस कार्यकर्ता ने शनिवार से अम्बाड चौफुली इलाके में एक पेड़ से बंधी चारपाई पर बैठकर अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया है।
विजय चव्हाण ने बताया कि उन्होंने जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसलिए उन्होंने यह अनोखा तरीका अपनाया। वर्तमान में बंजारा समुदाय को महाराष्ट्र में विमुक्त जाति और घुमंतू जनजातियों (वीजेएनटी) में तीन प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। लेकिन वह हैदराबाद गजट के अनुसार अनुसूचित जनजाति का दर्जा चाहते हैं।
ठाणे कोर्ट ने पिता को नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के लिए 20 साल की सजा सुनाई
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अदालत ने एक पिता को अपनी नाबालिग बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म करने और गर्भवती कराने के लिए 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी एस देशमुख ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता और POCSO अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया। आरोपी ने गर्भपात करने का प्रयास किया, असफल होने पर बिना सहमति के गर्भपात कराया और भ्रूण को गुप्त स्थान पर दफनाया। अदालत ने आरोपी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
अहिल्यानगर के नेताओं और वार्ड प्रमुखों का शिवसेना में प्रवेश
ठाणे में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने रविवार को अहिल्यानगर, नासिक और मुंबई के कई नेताओं, पार्षदों और वार्ड प्रमुखों को शिवसेना में शामिल किया। शिंदे ने कहा कि सभी मिलकर महाराष्ट्र को मजबूत करेंगे और लोकसभा चुनावों में पार्टी की जमीन मजबूत करेंगे। यह कदम स्थानीय निकाय चुनावों से पहले शिवसेना की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का बदला नाम, अब छत्रपति संभाजीनगर
महाराष्ट्र के औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अब छत्रपति संभाजीनगर स्टेशन कर दिया गया है। राज्य सरकार की जारी राजपत्र अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। मौजूदा राज्य सरकार ने यह कदम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार के औरंगाबाद शहर का औपचारिक रूप से नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर करने के लगभग तीन साल बाद उठाया है। यह नाम मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र को सम्मान के तौर पर मिला था। इस शहर का नाम पहले मुगल सम्राट औरंगजेब के नाम पर रखा गया था। दरअसल, मूल नाम परिवर्तन की यह पहल पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार ने की थी। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने 15 अक्तूबर को औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए एक राजपत्र अधिसूचना जारी की। औरंगाबाद रेलवे स्टेशन 1900 में खोला गया था। इसे हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली खान ने बनवाया था। यह रेलवे स्टेशन काचीगुडा-मनमाड खंड में है। यह खंड मुख्य रूप से छत्रपति संभाजीनगर शहर (पूर्व में औरंगाबाद) को सेवा प्रदान करता है।
जासूस बनकर ₹1.44 करोड़ की ठगी करने वाला गिरफ्तार
पुणे के 70 वर्षीय व्यक्ति को साइबर ठगों ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के अधिकारी बनकर 1.44 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया। शिकायत के अनुसार, 23 सितंबर को एक कॉलर ने खुद को मुंबई पुलिस निरीक्षक बताया और कहा कि लखनऊ एटीएस ने एक आतंकवादी को पकड़ा है जिसने शिकायतकर्ता के नाम से बैंक खातों का इस्तेमाल किया। बाद में ठग ने पुलिस वर्दी में वीडियो कॉल पर बात की और जांच का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवा लिए। 8 अक्टूबर को जब फिर ₹3 लाख मांगे गए, तब व्यक्ति ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।