महाराष्ट्र की सियासत में नजारा पल-पल बदल रहा है। अभी यह ठीक-ठीक नहीं मालूम कि किसके पास कितने विधायक हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल ये है कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने शपथ तो ले ली लेकिन उनके पास 145 विधायकों का समर्थन है मौजूदा हालात को देखें तो ऐसा नहीं लगता।
शनिवार सुबह तक अजित पवार के साथ एनसीपी के 11 विधायक गए थे। अब इनमें से छह विधायक शरद पवार के पास वापस आ गए हैं। इन विधायकों का कहना है कि उन्हें कुछ मालूम नहीं था, उन्हें अचानक पकड़कर राजभवन ले जाया गया।
देवेंद्र फडणवीस आगे क्या रणनीति अपनाएंगे, इस बारे में अभी कोई अंदाजा लगाना मुश्किल है क्योंकि उन्होंने शपथ तो ले ली लेकिन उनके पास उतने विधायक नहीं है। फिलहाल कोई नहीं जानता कि फडणवीस 145 विधायक कहां से लाएंगे। उन्हें 30 नवंबर को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है।
शनिवार तड़के देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेने के बाद कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। तीनों पार्टियों का कहना है कि राज्य में जो कुछ भी हुआ है, असंवैधानिक है। कांग्रेस ने इसे विशेष रूप से चुनौती दी है।
अतीत में पिछले राज्यों में पैदा हुई ऐसी ही परिस्थितियों पर वापस नजर डालें तो ऐसे में विधानसभा में शक्ति परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ है। महाराष्ट्र में शक्ति परीक्षण 30 नवंबर को होगा जिसमें अभी छह दिन-छह रातें बाकी हैं। ये रातें ही नहीं बल्कि अगली कई रातें भी महाराष्ट्र पर भारी पड़ने वाली हैं और ऐसा पिछले एक महीने से चलता रहा है।
ईमानदारी से कहें तो जो कुछ हो रहा है, उसकी ठीक-ठीक जानकारी नेताओं और पत्रकारों को भी नहीं है। सारे सूत्र फेल हो गए हैं।
एक जमाने में अजित पवार एनसीपी के बहुत बड़े नेता हुए करते थे। पिछले 10 वर्षों में उन्होंने कई मामलों पर कई बार अपनी नाराजगी जताई।
धीरे-धीरे पार्टी में उनका कद छोटा होता गया और ऐसा शरद पवार ने जानबूझकर भी किया। चाचा-भतीजे (शरद पवार और अजित पवार) की आपस में नहीं बनती है लेकिन कोई इस बारे में खुलकर बात नहीं करता।
अब अजित पवार ने शपथ तो ले ली है लेकिन उनके पास सिर्फ पांच विधायक ही बचे हैं। ऐसे में वो एनसीपी में अलगाव पैदा करके विधायकों को अपने साथ ला पाएंगे, ये मुश्किल लगता है।
देवेंद्र फडणवीस के शपथ लेने के बावजूद अगर आज महाराष्ट्र में अगर किसी के पास ताकत है तो शरद पवार के पास है। फिर चाहे वो अलग-अलग पार्टियों के साथ रिश्तों के मामले में हो या फिर संख्याबल के बारे में।
अगले कुछ दिनों में क्या होगा, अभी इस बारे में ज्यादा कुछ कहा नहीं जा सकता। यह भी ठीक-ठीक नहीं मालूम कि किस पार्टी के विधायक किसके संपर्क में हैं। इन सबके बीच एक महत्वपूर्ण बात ये है कि कई लोगों पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की जांच चल रही है, जिसमें अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल भी शामिल हैं।